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सर्वकोश
दायभाग (जीमूतवाहन - पं. वासुदेव कृष्ण चतुर्वेदी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

दायभाग (जीमूतवाहन - पं. वासुदेव कृष्ण चतुर्वेदी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Dayabhaga of Jimutavahana with Hindi Commentary

जीमूतवाहन (टीकाकार: पं. वासुदेव कृष्ण चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished46 पृष्ठ

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CC-0. Agamnigam Digital Presevation Foundation, Chandigarh
( २५ )
पति या श्वसुर ने स्त्री धन नदिया हो । यदि स्त्री धन दिया जा चुका है
तो दत्ते त्वर्धं प्रकल्पयेत् = दें देनें पर आधा दिया जाय ।
विशेषः---
१ यहां अर्ध शब्द समविभाग के वचन के लिये नहीं अपितु
पूर्व दत्त आधिवेदनिक के समजिनता हो उतना है ।
विभाग सन्देह होने पर निर्णय—
विभाग निह्नवे ज्ञाति बन्धु साक्ष्यभिलेखितैः
विभाग भावना ज्ञेयागृह क्षेत्रैश्च यौतकैः ।१४९।
अन्वयः----
विभाग निह्नवे ज्ञाति बन्धु साक्ष्यभि लिखितै विभाग
भावना ज्ञेया यौतकैः गृह क्षेत्रैश्च ॥
अर्थः--विभाग निह्नवे=विभाग छिपने पर, ज्ञाति--ज्ञाति
बन्धुः--पितृ बन्धु मातृ बन्धु, साक्षी, लिखितैः--विभाग पत्र से विभाग
भावना--विभाग निर्णय, ज्ञेया--जानना चाहिये । यौतकैः--पृथक् कृत,
गृह क्षेत्रैश्च--खेती आदि कार्य यज्ञादि धर्म स्वतन्त्रता से किये जा
सकते हैं ।
विशेष ----
१ जब तक बंटवारा न हो तब तक धर्म एक है विभक्त हो
जाने पर धर्म--श्राद्धादि भी पृथक् २ करने चाहिये ।
साक्षित्वंप्राति भाव्यं च दानं ग्रहण मेव च
विभक्ता भ्रातरः कुर्युर्नाविभक्ताः कथंचन ॥
[ ना० २३।४३ ]
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