दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)
Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press
सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
४८ दरिया साहब मारवाड़
तीन लोक चौदह भवन, केवल भरपूरा।
हाजिराँ से हाजिर सदा, दूराँ से दूरा ॥२॥
पाप पुन्न दोउ रूप हैं, उनहीं की माया।
साधन के बरतन सदा, भरमै भरमाया ॥३॥
जन दरिया इक राम भज, भजबे की बारा।
जिन यह भार उठाइया, उनके सिर भारा ॥४॥
। राग गुंड ॥
अमृत नीका कहै सब कोई,
पीये बिना अमर नहिं होई ॥१॥
कोइ कहै अमृत बसै पताल,
नर्क अंत नित ग्रासै काल ॥२॥
कोइ कहै अमृत समुँदर माँहि,
बड़वा अगिन क्यों सोखत ताहि ॥३॥
कोइ कहै अमृत ससि में बास,
घटै बढ़ै क्यों होइहै नास ॥४॥
कोइ कहै अमृत सुरगाँ माहिं,
देव पियें क्यों खिर खिर जाहिं ॥५॥
सब अमृत बातों की बात,
अमृत है संतन के साथ ॥६॥
दरिया अमृत नाम अनंत,
जा को पी पी अमर भये संत ॥७॥
॥ राग बिहंगड़ा ॥
साधो अरट बहै घट माहीं।
जो देखा ताही को दरसै, आदि अंत कछु नाहीं ॥टेक॥
अरध उरध बिच अमृत कूवा, जल पीवै कोइ दासा।
उलटी माल गगन को चाली, सहज भरै आकासा ॥१॥
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