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दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press

सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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दरिया साहब (मारवाड़ वाले)
का
जीवन-चरित्र
—:❀:—
दरिया साहब ने मारवाड़ के जैतारन नामक गाँव में भादों वदी अष्टमी संवत् १७३३
(बिक्रमी) के दिन एक मुनलमान कुल में जन्म लिया और अगहन सुदी पूनों संवत् १८१५
को ८२ वरस से अधिक अवस्था में परलोक को सिधारे। उस समय महाराज वख्तसिंह जी
मारवाड़ के राजा थे। दरिया साहब के वाप मा जाति के धुनियां थे जैसा कि उन्होंने एक
पद में कहा है।
जो धुनियाँ तौ भी मैं राम तुम्हारा ।
अधम कमीन जाति मतिहीना,
तुम तो हौ सिर ताज हमारा ।
दरिया साहब की सात ही वरस की उमर मे उनके पिता का देहान्त हुआ जिस से
उसी देश के रैन नामक गाँव, परगना मेढ़ता में अपने नाना के घर जाकर रहे।
ˋनाना का नाम कमीच था।
कहते हैं कि महाराज वख्तसिंह जी को एक असाध रोग था जिसका इलाज करते
, ते वह हार गये। आखिर भाग्य से दरिया साहब के आश्रम पर रैन गाँव में जा कर
[ ]रता से विनती की जिस पर दरिया साहब ने दया करके अपने गुरुमुख चेले सुखरामदास
के द्वारा उन को उपदेश दिया और राजा आरोग्य हो गये। सुखरामदास जी जाति के
कलीगर लोहार थे जिन का स्थान रैन में अब तक मौजूद है जहाँ हर वरस मेला
[लग]ता है।
दरिया साहब के गुरु प्रेमजी थे जो बीकानेर के गाँव खियानूसर मे रहते थे।
मारवाड़ (राजपूताना) में दरिया साहब के मत के हजारों आदमी है। दरिया पंथियों
विश्वास के अनुसार नीचे लिखा हुआ दोहा महात्मा दादू साहब ने दरिया साहब के
[हो]ने से एक सौ वरस पहले कहा था –