सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग धना श्री 27
देखो लोचन सार वे, देखो लोचन सार,
सोई प्रकट होई, यह अचम्भा पेखिये ।
दयावंत दयालु ऐसो, बरण अति विशेखिये ॥ 2 ॥
अकल स्वरूप पीव का, प्राण जीव का, सोई जन जे पावही ।
दयावंत दयालु ऐसो, सहजैं आप लखावही ॥
लखै सु लखणहार वे, लखै सोई संग होई, अगम बैन सुनावही ।
सब दुःख भागा रंग लागा, काहे न मंगल गावही ॥ 3 ॥
अकल स्वरूप पीव का, कर कैसे करि आणिये ।
निरन्तर निर्धार आपै, अन्तर सोई जाणिये ॥
जाणहु मन विचारा वे, मन विचारा सोई सारा, सुमिर सोई बखानिये ।
श्री रंग सेती रंग लागा, दादू तो सुख मानिये ॥ 4 ॥
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दीपचन्दी
राम तहाँ प्रगट रहे भरपूर, आत्मा कमल जहाँ,
परम पुरुष तहाँ, झिलमिल झिलमिल नूर ॥ टेक ॥
चन्द सूर मध्य भाइ, तहाँ बसै राम राइ, गंग जमुन के तीर ।
त्रिवेणी संगम जहाँ, निर्मल विमल तहाँ, निरख निरख निज नीर ॥ 1 ॥
आत्मा उलटि जहाँ, तेज पुंज रहै तहाँ, सहज समाइ ।
अगम निगम अति, जहाँ बसै प्राणपति, परसि परसि निज आइ ॥ 2 ॥
कोमल कुसम दल, निराकार ज्योति जल, वार न पार ।
शून्य सरोवर जहाँ, दादू हंसा रहै तहाँ, विलसि-विलसि निज सार ॥ 3 ॥ -
फरोदस्त ताल
गोविन्द पाया मन भाया, अमर कीये संग लीये ।
अक्षय अभय दान दीये, छाया नहीं माया ॥ टेक ॥
अगम गगन अगम तूर, अगम चन्द अगम सूर ।
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