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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 44, कुल 504 में से

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पृष्ठ 44

श्री दादूवाणी-स्मरण का अंग 2
सुमिरण नाम महिमा
दादू निमिष न न्यारा कीजिये, अंतर थैं उर नाम।
कोटि पतित पावन भये, केवल कहतां राम ॥ 26 ॥
मन प्रबोध
दादू जे तैं अब जाण्या नहीं, राम नाम निज सार।
फिर पीछै पछिताहिगा, रे मन मूढ गँवार ॥ 27 ॥
दादू राम संभाल ले, जब लग सुखी सरीर।
फिरि पीछै पछिताहिगा, जब तन मन धरै न धीर ॥ 28 ॥
दुख दरिया संसार है, सुख का सागर राम।
सुख सागर चलि जाइए, दादू तज बेकाम ॥ 29 ॥
दादू दरिया यहु संसार है, तामें राम नाम निज नाव।
दादू ढील न कीजिये, यहु औसर यहु डाव ॥ 30 ॥
स्मरण नाम निःसंशय
मेरा संसा को नहीं, जीवण मरण का राम।
सुपिनैं ही जनि बीसरै, मुख हिरदै हरि नाम ॥ 31 ॥
स्मरण नाम विरह
दादू दुखिया तब लगै, जब लग नाम न लेहि।
तब ही पावन परम सुख, मेरी जीवनि येहि ॥ 32 ॥
स्मरण नाम पारख लक्षण
कछु न कहावे आप को, सांई को सेवे।
दादू दूजा छाड़ि सब, नाम निज लेवे ॥ 33 ॥
नाम स्मरण से जीवों के संशय की निवृत्ति
जे चित्त चहुँटै राम सौं, सुमिरण मन लागै।
दादू आत्मा जीव का, संसा सब भागै ॥ 34 ॥
स्मरण नाम चितावणी
दादू पीव का नाम ले, तो मिटै सिर साल।
घड़ी मुहूरत चालनां, कैसी आवै काल ॥ 35 ॥

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