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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 42, कुल 504 में से

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पृष्ठ 42

श्री दादूवाणी-स्मरण का अंग 2
दादू नीका नांव है, हरि हिरदै न बिसारि ।
मूरति मन मांहैं बसै, सांसैं सांस संभारि ॥ 5 ॥
सांसैं सांस संभालतां, इक दिन मिलि है आइ ।
सुमिरण पैंडा सहज का, सतगुरु दिया बताइ ॥ 6 ॥
दादू नीका नांव है, सौ तू हिरदय राखि ।
पाखंड प्रपंच दूर करि, सुन साधुजन की साखि ॥ 7 ॥
दादू नीका नांव है, आप कहै समझाइ ।
और आरम्भ सब छाड़ दे, राम नाम ल्यौ लाइ ॥ 8 ॥
राम भजन का सोच क्या, करता होइ सो होइ ।
दादू राम संभालिये, फिर बुझिये न कोइ ॥ 9 ॥
नाम चेतावनी
राम तुम्हारे नांव बिन, जे मुख निकसै और ।
तो इस अपराधी जीव को, तीन लोक कित ठौर ॥ 10 ॥
छिन-छिन राम संभालतां, जे जीव जाइ तो जाय ।
आतम के आधार को, नाहीं आन उपाय ॥ 11 ॥
स्मरण माहात्म्य
एक मुहूर्त्त मन रहै, नांव निरंजन पास ।
दादू तब ही देखतां, सकल कर्म का नास ॥ 12 ॥
सहजैं ही सब होइगा, गुण इन्द्रिय का नास ।
दादू राम संभालतां, कटैं कर्म के पास ॥ 13 ॥
स्मरण नाम चितावनी
राम नाम गुरु शब्द सों, रे मन पेलि भरम ।
निहकर्मी सौं मन मिल्या, दादू काट करम ॥ 14 ॥
एक राम के नाम बिन, जीव की जलन न जाइ ।
दादू केते पचि मुए, करि-करि बहुत उपाइ ॥ 15 ॥

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