सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग आसावरी 9
241. गुरु ज्ञान । वर्ण भिन्न ताल
मेरा गुरु ऐसा ज्ञान बतावै ।
काल न लागै, संशय भागै, ज्यों है त्यों समझावै ॥ टेक ॥
अमर गुरु के आसन रहिये, परम ज्योति तहँ लहिये ।
परम तेज सो दृढ़ कर गहिये, गहिये लहिये रहिये ॥ 1 ॥
मन पवना गहि आतम खेला, सहज शून्य घर मेला ।
अगम अगोचर आप अकेला, अकेला मेला खेला ॥ 2 ॥
धरती अम्बर चंद न सूरा, सकल निरंतर पूरा ।
शब्द अनाहद बाजहिं तूरा, तूरा पूरा सूरा ॥ 3 ॥
अविचल अमर अभय पद दाता, तहाँ निरंजन राता ।
ज्ञान गुरु ले दादू माता, माता राता दाता ॥ 4 ॥
242. राज विद्याधर ताल
मेरा गुरु आप अकेला खेलै ।
आपै देवै आपै लेवै, आपै द्वै कर मेलै ॥ टेक ॥
आपै आप उपावै माया, पंच तत्त्व कर काया ।
जीव जन्म ले जग में आया, आया काया माया ॥ 1 ॥
धरती अंबर महल उपाया, सब जग धंधै लाया ।
आपै अलख निरंजन राया, राया लाया पाया ॥ 2 ॥
चन्द सूर दोइ दीपक कीन्हा, रात दिवस कर लीन्हा ।
राजिक रिजक सबन को दीन्हा, दीन्हा लीन्हा कीन्हा ॥ 3 ॥
परम गुरु सो प्राण हमारा, सब सुख देवै सारा ।
दादू खेलै अनन्त अपारा, अपारा सारा हमारा ॥ 4 ॥
243. हैरान । राज विद्याधर ताल
थकित भयो मन कह्यो न जाई, सहज समाधि रह्यो ल्यौ लाई ॥ टेक ॥
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