सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-गुरुदेव का अंग 1
बैद बिथा कहै देखि करि, रोगी रहै रिसाइ।
मन मांहै लीये रहै, दादू व्याधि न जाइ ॥ 152 ॥
दादू बैद बिचारा क्या करै, रोगी रहै न साच।
खाटा मीठा चरपरा, मांगै मेरा वाच ॥ 153 ॥
गुरु उपदेश
दुर्लभ दर्शन साध का, दुर्लभ गुरु उपदेश ।
दुर्लभ करबा कठिन है, दुर्लभ परस अलेख ॥ 154 ॥
गुरु मन्त्र (गायत्री मन्त्र)
दादू अविचल मंत्र, अमर मंत्र, अखै मंत्र,
अभै मंत्र, राम मंत्र, निजसार ।
संजीवन मंत्र, सवीरज मंत्र, सुन्दर मंत्र,
शिरोमणि मंत्र, निर्मल मंत्र, निराकार ॥
अलख मंत्र, अकल मंत्र, अगाध मंत्र, अपार मंत्र, अनन्त मंत्र राया।
नूर मंत्र, तेज मंत्र, ज्योति मंत्र, प्रकाश मंत्र, परम मंत्र, पाया ॥
उपदेश दीक्षा दादू गुरु राया ॥ 155 ॥
दादू सब ही गुरु किए, पशु पंखी बनराइ।
तीन लोक गुण पंच सौं, सबही मांहिं खुद आइ ॥ 156 ॥
जे पहली सतगुरु कह्या, सो नैनहुँ देख्या आइ।
अरस परस मिलि एक रस, दादू रहे समाइ ॥ 157 ॥
इति श्री दादूदास-विरचिते सतगुरु-प्रसादेन प्रोक्तं भक्तियोगनाम
तत्वसारमत-सर्वसाधुर्बुद्धिज्ञान-सर्वशास्त्र-शोधितं रामनाम सतगुरुशिक्षा
धर्मशास्त्र-सत्योपदेश-ब्रह्मविद्यायां मनुष्य जीवनाम् नित्य-श्रवणं पठनं
मोक्षदायकम् श्री दादूवाणीनाम् माहात्म्य
प्रथमो श्री गुरुदेव का अंग सम्पूर्ण ॥ अंग 1 ॥ साखी 157 ॥
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