सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
DevanagariHindipublished504 पृष्ठ
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अथ राग कान्हड़ा 4
(गायन समय रात्रि 12 से 3 बजे तक)
94. विरह विनती । वर्ण भिन्नताल
दे दर्शन देखन तेरा, तो जिय जक पावै मेरा ॥ टेक ॥
पीव तूँ मेरी वेदन जानै, हौं कहाँ दुराऊं छानै,
मेरा तुम देखे मन मानै ॥ 1 ॥
पीव करक कलेजे मांही, सो क्योंही निकसै नांही,
पीव पकर हमारी बांही ॥ 2 ॥
पीव रोम रोम दुख सालै, इन पीरों पिंजर जालै,
जीव जाता क्यों ही बालै ॥ 3 ॥
पीव सेज अकेली मेरी, मुझ आरति मिलणै तेरी,
धन दादू वारी फेरी ॥ 4 ॥
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