सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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श्री दादूवाणी-साक्षीभूत का अंग 35
ना हम करैं करावैं आरती, ना हम पिवैं पिलावैं नीर ।
करै करावै सांइयाँ, दादू सकल शरीर ॥ 15 ॥
करै करावै सांइयाँ, जिन दिया औजूद ।
दादू बन्दा बीच में, शोभा को मौजूद ॥ 16 ॥
देवै लेवै सब करै, जिन सिरजे सब कोइ ।
दादू बन्दा महल में, शोभा करैं सब कोइ ॥ 17 ॥
कर्त्ता साक्षीभूत
दादू जुवा खेले जाणराइ, ताको लखै न कोइ ।
सब जग बैठा जीत कर, काहू लिप्त न होइ ॥ 18 ॥
इति श्री दादूदास-विरचिते सतगुरु-प्रसादेन प्रोक्तं भक्तियोगनाम
तत्वसारमत-सर्वसाधुर्बुद्धिज्ञान-सर्वशास्त्र-शोधितं रामनाम सतगुरुशिक्षा
धर्मशास्त्र-सत्योपदेश-ब्रह्मविद्यायां मनुष्य जीवनाम् नित्य-श्रवणं पठनं
मोक्षदायकम् श्री दादूवाणीनाम् माहात्म्य
पैंतीसवां साक्षीभूत काअंग सम्पूर्ण ॥ अंग 35 ॥ साखी 18 ॥
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