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सर्वकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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पृष्ठ 279

कस्तूरिया मृग
का
अंग
www.dadooram.org
अथ कस्तूरिया मृग का अंग ३१
मंगलाचरण
दादू नमो नमो निरंजनं, नमस्कार गुरुदेवतः ।
वन्दनं सर्व साधवा, प्रणामं पारंगतः ।। 1 ।।
दादू घट कस्तूरी मृग के, भ्रमत फिरै उदास ।
अन्तरगति जाणै नहीं, तातैं सूंघै घास ।। 2 ।।
सब घट में गोविन्द है, संग रहै हरि पास ।
कस्तूरी मृग में बसै, सूंघत डोलै घास ।। 3 ।।
दादू जीव न जानै राम को, राम जीव के पास ।
गुरु के शब्दों बाहिरा, तातैं फिरै उदास ।। 4 ।।

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