सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-शब्द का अंग 22
पंच ऊपना शब्द तैं, शब्द पंच सौं होइ ।
सांई मेरे सब किया, बूझै विरला कोइ ॥ 15 ॥
दादू एक शब्द सौं ऊनवै, वर्षन लागै आइ ।
एक शब्द सौं बीखरै, आप आपको जाइ ॥ 16 ॥
दादू साधु शब्द सौं मिल रहै, मन राखै बिलमाइ ।
साधु शब्द बिन क्यों रहै, तब ही बीखर जाइ ॥ 17 ॥
दादू शब्द जरै सो मिल रहै, एक रस पूरा ।
कायर भाजै जीव ले, पग मांडै शूरा ॥ 18 ॥
शब्द विचारै करणी करै, राम नाम निज हिरदै धरै ।
काया मांहीं शोधै सार, दादू कहै लहै सो पार ॥ 19 ॥
दादू काहे कौड़ी खर्चिये, जे पैके सीझै काम ।
शब्दों कारज सिध भया, तो सुरम न दीजै राम ॥ 20 ॥
दादू राम हृदय रस भेलि कर, को साधु शब्द सुनाइ ।
जानो कर दीपक दिया, भ्रम तिमिर सब जाइ ॥ 21 ॥
दादू वाणी प्रेम की, कमल विकासै होहि ।
साधु शब्द माता कहैं, तिन शब्दों मोह्या मोहि ॥ 22 ॥
दादू हरि भुरकी वाणी साधु की, सो परियो मेरे शीश ।
छूटे माया मोह तैं, प्रेम भजन जगदीश ॥ 23 ॥
दादू भुरकी राम है, शब्द कहैं गुरु ज्ञान ।
तिन शब्दों मन मोहिया, उनमन लागा ध्यान ॥ 24 ॥
दादू वाणी ब्रह्म की, अनभै घट प्रकाश ।
राम अकेला रह गया, शब्द निरंजन पास ॥ 25 ॥
शब्दों माहिं राम धन, जे कोई लेइ विचार ।
दादू इस संसार में, कबहुं न आवे हार ॥ 26 ॥
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