सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-समर्थता का अंग 21
दादू कर्त्ता करै तो निमष में, ठाली भरै भंडार।
भरिया गह ठाली करै, ऐसा सिरजनहार ॥ 5 ॥
दादू धरती को अम्बर करै, अम्बर धरती होइ।
निशि अँधियारी दिन करै, दिन को रजनी सोइ ॥ 6 ॥
मृतक काढ मसाण तैं, कहु कौन चलावै।
अविगत गति नहिं जाणिये, जग आन दिखावै ॥ 7 ॥
दादू गुप्त गुण परगट करै, परगट गुप्त समाइ।
पलक मांहि भानै घड़ै, ताकी लखी न जाइ ॥ 8 ॥
पोषपाल रक्षक
दादू सोई सही साबित हुआ, जा मस्तक कर देइ।
गरीब निवाजे देखतां, हरि अपना कर लेइ ॥ 9 ॥
सूक्ष्म मार्ग
दादू सब ही मारग सांइयाँ, आगै एक मुकाम।
सोई सन्मुख कर लिया, जाही सेती काम ॥ 10 ॥
पोष प्रतिपाल रक्षक
मीरां मुझ सौं महर कर, सिर पर दीया हाथ।
दादू कलियुग क्या करै, सांई मेरा साथ ॥ 11 ॥
ईश्वर समर्थाई
दादू समर्थ सब विधि सांइयाँ, ताकी मैं बलि जाऊँ।
अंतर एक जु सो बसै, औरां चित्त न लाऊँ ॥ 12 ॥
सूक्ष्म मार्ग
दादू मार्ग महर का, सुखी सहज सौं जाइ।
भवसागर तैं काढ कर, अपणे लिये बुलाइ ॥ 13 ॥
ईश्वर समर्थाई
दादू जे हम चिन्तवैं, सो कछु न होवै आइ।
सोई कर्त्ता सत्य है, कुछ औरै कर जाइ ॥ 14 ॥
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