सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-विचार का अंग 18
प्रेम भक्ति दिन दिन बधै, सोई ज्ञान विचार।
दादू आतम शोध कर, मथ कर काढ्या सार ॥ 37 ॥
दादू जिहिं बरियां यहु सब भया, सो कुछ करो विचार।
काजी पंडित बावरे, क्या लिख बांधे भार ॥ 38 ॥
दादू जब यहु मनहि मन मिल्या, तब कुछ पाया भेद।
दादू लेकर लाइये, क्या पढ़ मरिये वेद ॥ 39 ॥
पाणी पावक, पावक पाणी, जाणै नहीं अजाण।
आदि रु अंत विचार कर, दादू जाण सुजाण ॥ 40 ॥
सुख मांहि दुख बहुत हैं, दुख मांही सुख होइ।
दादू देख विचार कर, आदि अंत फल दोइ ॥ 41 ॥
मीठा खारा, खारा मीठा, जाने नहीं गँवार।
आदि अंत गुण देखकर, दादू किया विचार ॥ 42 ॥
कोमल कठिन, कठिन है कोमल, मूरख मर्म न बूझै।
आदि रु अंत विचार कर, दादू सब कुछ सूझै ॥ 43 ॥
पहली प्राण विचार कर, पीछे पग दीजे।
आदि अंत गुण देख कर, दादू कुछ कीजे ॥ 44 ॥
पहली प्राण विचार कर, पीछे चलिये साथ।
आदि अंत गुण देखकर, दादू घाली हाथ ॥ 45 ॥
पहली प्राण विचार कर, पीछे कुछ कहिये।
आदि अंत गुण देखकर, दादू निज गहिये ॥ 46 ॥
पहली प्राण विचार कर, पीछे आवै जाइ।
आदि अंत गुण देख कर, दादू रहै समाइ ॥ 47 ॥
दादू सोच करै सो सूरमा, कर सोचै सो कूर।
कर सोच्यां मुख श्याम है, सोच कियां मुख नूर ॥ 48 ॥
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