सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 201, कुल 504 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 201

श्री दादूवाणी–मध्य का अंग 16
बैरागी वन में बसै, घरबारी घर मांहि।
राम निराला रह गया, दादू इनमें नांहि ॥ 39 ॥
दीन दुनी सदिकै करूं, टुक देखण दे दीदार।
तन मन भी छिन छिन करूं, भिश्त दोजग भी वार ॥ 40 ॥
दादू जीवन मरण का, मुझ पछतावा नांहि।
मुझ पछतावा पीव का, रह्या न नैनहुँ मांहि ॥ 41 ॥
स्वर्ग नरक संशय नहीं, जीवन मरण भय नांहि।
राम विमुख जे दिन गये, सो सालैं मन मांहि ॥ 42 ॥
स्वर्ग नरक सुख दुख तजे, जीवन मरण नशाइ।
दादू लोभी राम का, को आवै को जाइ ॥ 43 ॥
मध्य निष्पक्ष
दादू हिन्दू तुरक न होइबा, साहिब सेती काम।
षट् दर्शन के संग न जाइबा, निर्पख कहबा राम ॥ 44 ॥
षट् दर्शन दोन्यों नहीं, निरालंब निज बाट।
दादू एकै आसरे, लंघे औघट घाट ॥ 45 ॥
दादू ना हम हिन्दू होहिंगे, ना हम मुसलमान।
षट् दर्शन में हम नहीं, हम राते रहमान ॥ 46 ॥
जोगी जंगम सेवड़े, बौद्ध सन्यासी शेख।
षट् दर्शन दादू राम बिन, सबै कपट के भेख ॥ 47 ॥
दादू अल्लाह राम का, द्वै पख तैं न्यारा।
रहिता गुण आकार का, सो गुरु हमारा ॥ 48 ॥
उभय असमाव
दादू मेरा तेरा बावरे, मैं तैं की तज बान।
जिन यहु सब कुछ सिरजिया, करता ही का जान ॥ 49 ॥

  • 201 -