सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
पृष्ठ 146, कुल 504 में से
संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-माया का अंग 12
यों माया का सुख मन करै, सेजां सुंदरी पास ।
अंत काल आया गया, दादू होहु उदास ॥ 5 ॥
जे नांही सो देखिये, सूता सपने माँहि ।
दादू झूठा है गया, जागे तो कुछ नांहि ॥ 6 ॥
यहु सब माया मृग जल, झूठा झिलमिल होइ ।
दादू चिलका देखि कर, सत कर जाना सोइ ॥ 7 ॥
झूठा झिलमिल मृग जल, पाणी कर लीया ।
दादू जग प्यासा मरै, पसु प्राणी पीया ॥ 8 ॥
पति पहचान
छलावा छल जायगा, सपना बाजी सोइ ।
दादू देख न भूलिये, यहु निज रूप न होइ ॥ 9 ॥
चितावणी
सपने सब कुछ देखिये, जागे तो कुछ नांहि ।
ऐसा यहु संसार है, समझ देखि मन माँहि ॥ 10 ॥
दादू ज्यों कुछ सपने देखिये, तैसा यहु संसार ।
ऐसा आपा जानिये, फूल्यो कहा गँवार ॥ 11 ॥
दादू जतन जतन करि राखिये, दिढ़ गहि आतम मूल ।
दूजा दृष्टि न देखिये, सब ही सैंबल फूल ॥ 12 ॥
दादू नैनहुँ भर नहिं देखिये, सब माया का रूप ।
तहँ ले नैना राखिये, जहाँ है तत्त्व अनूप ॥ 13 ॥
हस्ती हय बर धन देख कर, फूल्यो अंग न माइ ।
भेरि दमामा एक दिन, सब ही छाड़े जाइ ॥ 14 ॥
दादू माया बिहड़ै देखतां, काया संग न जाइ ।
कृत्रिम बिहड़ै बावरे, अजरावर ल्यौ लाइ ॥ 15 ॥
- 146 -