सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-सूक्ष्म जन्म का अंग 11
सब गुण सब ही जीव के, दादू व्यापैं आइ।
घट मांहि जामैं मरै, कोइ न जाणै ताहि ॥ 4 ॥
जीव जन्म जाणै नहीं, पलक पलक में होइ।
चौरासी लख भोगवै, दादू लखै न कोइ ॥ 5 ॥
अनेक रूप दिन के करै, यहु मन आवै जाइ।
आवागमन मन का मिटै, तब दादू रहै समाइ ॥ 6 ॥
निशिवासर यहु मन चलै, सूक्ष्म जीव संहार।
दादू मन थिर कीजिये, आतम लेहु उबारि ॥ 7 ॥
कबहुँ पावक कबहुँ पाणी, धर अम्बर गुण बाइ।
कबहुँ कुंजर कबहुँ कीड़ी, नर पशुवा ह्वै जाइ ॥ 8 ॥
करणी बिना कथनी
शूकर स्वान सियाल सिंह, सर्प रहैं घट मांहि।
कुंजर कीड़ी जीव सब, पांडे जाणै नांहि ॥ 9 ॥
इति श्री दादूदास-विरचिते सतगुरु-प्रसादेन प्रोक्तं भक्ति योगनाम
तत्वसारमत-सर्वसाधुर्बुद्धिज्ज्ञान-सर्वशास्त्र-शोधितं रामनाम सतगुरुशिक्षा
धर्मशास्त्र-सत्योपदेश-ब्रह्मविद्यायां मनुष्य जीवनाम् नित्य-श्रवणं पठनं
मोक्षदायकम् श्री दादूवाणीनाम् माहात्म्य
ग्यारहवां सूक्ष्म जन्म का अंग सम्पूर्ण ॥ अंग 11 ॥ साखी 9 ॥
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