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सर्वकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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पृष्ठ 104

जरणा का अंग
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अथ जरणा का अंग ५
मंगलाचरण
दादू नमो नमो निरंजनं, नमस्कार गुरुदेवतः ।
वंदनं सर्व साधवा, प्रणामं पारंगततः ।। 1 ।।
जरणा का स्वरूप
को साधु राखै रामधन, गुरु बाइक वचन विचार ।
गहिला दादू क्यों रहै, मरकत हाथ गँवार ।। 2 ।।
जनि खोवै दादू रामधन, हिरदै राखि जनि जाइ ।
रतन जतन करि राखिये, चिंतामणि चित लाइ ।। 3 ।।
दादू मन ही मांहि समझ कर, मन ही मांहि समाइ ।
मन ही मांहि राखिये, बाहर कहि न जनाइ ।। 4 ।।

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