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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 736, कुल 793 में से

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पृष्ठ 736

दृष्टि से घूरते हुए देखा। बादशाह ने कहा, "एक जंगली चूहा, मामूली जमींदार
मरगठ्ठों की सल्तनत खड़ी कर ले, यह कितनी बहादुरी की बात है?"
"बादशाह, मेरे पिताजी की दौलत किसी घमंडी सुल्तान की गद्दी नहीं थी।
वह गरीब गुर्बों का, उनके सपनों का साम्राज्य था।"
थोड़े गम्भीर स्वर में औरंगजेब ने कहा, "कितना खुशकिस्मत है वह शिवा
जिसने तुम्हारे जैसे होनहार बेटे को जन्म दिया। तुम पर हमें बहुत नाज होता है।
आदमी अनुभव से सीखता है, ठेस लगने से सावधान होता है। तुमने मुझे आठ वर्ष
तक चक्कर कटवाया है। उस अनुभव से मैं तुम्हारी वीरता खुले रूप में स्वीकार
करता हूँ। शहजादे, यह तुम्हारी तारीफ नहीं हकीकत है। अपने पिता की, मरगठ्ठों
की गद्दी को सँभालने के लिए जिस तरह तुमने मुकाबला किया अपने किलों को
बचाकर रखा, समुद्र के पानी में आग लगाई, ऐसी थोड़ी-बहुत औकात मेरे चार
शहजादों में से किसी में भी हो तो-?"
सम्भाजी राजा ने गहरी साँस ली। वे बादशाह की नजरों में अपनी क्रुद्ध नजरों
मे देखते हुए बोले, "औरंगजेब बादशाह ऐसी झूठी प्रशंसा करने के बदले तुम्हें जो
चाहिए वह साफ-साफ कहो और छुट्टी पाओ।"
"तुम्हारा सबसे समृद्ध खजाना कहाँ है?"
"हर किले पर।"
"हमारी फौज के कौन-कौन से गद्दार शैतान तुम्हारे साथ मिले हैं?"
"पता नहीं।"
"घमंडी सम्भा, अब तो होश में आओ। एक मूर्ख शायर के साथ मिलकर
नादान मत बनो। तुम्हें इस बात का अनुमान नहीं है। हमारे जुल्फिकारखान की
चालीस हजार की फौज अब तक रायगढ़ में घुस चुकी होगी। रायगढ़ के किले पर
घेरा भी डाल दिया होगा।"
"बेवकूफ बादशाह, हमारा रायगढ़ बालू की दीवार से नहीं बना है?"
"फौलाद का बना हो तो भी उसे पिघला दो। ऐसी आज्ञा देकर ही मैंने
जुल्फिकार को वहाँ भेजा है।"
"पत्थर का है। उसके दो टुकड़े भी नहीं हो सकते।"
"बेमुरौवत काफिर बच्चे अपनी जान बचाओ! किसके भरोसे तुम इतना
घमंड करते हो? तुम्हारे प्रदेश की हर घाटी में हमारी फौज घुसने लगी है। यह भी
बारीकी से देखो कि तुम्हारे मुल्क के सारे जागीरदार हमारे दरबार में दौड़ लगा रहे
हैं।"
"जागीर के टुकड़ों के लोभ में जी हुजूरी करने वाले कुछ जागीरदारों का
मतलब महाराष्ट्र नहीं है। मर्दों का सच्चा महाराष्ट्र झुकेगा नहीं, झुकेगा तो नहीं
734 :: सम्भाजी