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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 542, कुल 793 में से

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पृष्ठ 542

“हरजी राजा ने विरोध किया तो?”
“केसो काका, हम आपसे और अधिक क्या कहें? आप शिवाजी महाराज के
साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर चलने वाले बुजुर्ग हैं। आपको क्या ममझाना?
शीघ्रातिशीघ्र निकल जाइए। अकाल के जबड़े में फँसे लोगों को आपको ही बचाना
है। इसलिए आप वही कीजिए जो शिवाजी महाराज के सहयोगी को शोभा दे।”
आयु की सत्तर सीढ़ियों पर पहुँचे केसो पन्त झट से खड़े हो गये। उन्होंने
महाराज को नमन किया। महाराज ने केसो पन्त के साथ तरुण मन्ताजी को भेजने का
निश्चय किया था। वे दोनों शीघ्रता से किले से नीचे उतरने लगे।
दस
गत हो गयी। अन्धकार फैल गया। कल आगे निकली शाही फौज ने पानी की
मुविधा देखकर लालबारी के डेरे डंडे खड़े किये थे। मशालों से धुआँ निकल रहा
था। बादशाह के लाल तम्बू में चिराग जल उठे। वजीर ने आलमगीर के सामने
बीजापुर परिसर का नक्शा फैला रखा था। बीजापुर पर घेरा डाले बारह तेरह महीने
हो गये थे। खजाने के द्रव्य से भरी चमड़े की थैलियाँ खाली हो चुकी थीं। खाली
थैलियों के ढेर लगे थे। हजारों ऊँट और घोड़े मर चुके थे। किन्तु अपेक्षित सफलता
मिल नहीं रही थी। इससे बादशाह बहुत सन्तप्त हो गया था।
नक्शे पर बारीकी से दृष्टि डालते हुए बादशाह ने कहा, “वजीरे आजम,
बीजापुर की यह तटबन्दी कैसे पत्थरों की बनी है कि डेढ़ वर्ष होने को आया फिर
भी गिरने को तैयार नहीं?”
बीजापुर नगर के चारों ओर ढाई मील की पत्थरों की मजबूत दीवार बनाई
गयी थी। इसकी ऊँचाई तीम से पचास हाथ और चौड़ाई मामान्यतः बीम हाथ थी।
जगह जगह पर बुर्ज और चबूतरे बनाए गये थे। बीच बीच में लम्बी नली की
बन्दूकों को बाहर निकालने की व्यवस्था की गयी थी।
दीवार के बाहर चालीस से पचास हाथ चौड़ी गहरी खाई खोदी गयी थी।
उसे पहले पार करने पर दीवार तक पहुँचा जा सकता था। छानवे बुर्जों में से शेरजी
नामक भव्य बुर्ज पर मालिक ई-मैदान नाम की बहुत दूर तक मार करने वाली तोप
रखी थी। शहजादा आजम ने दीवार के मामने ऊँच चबूतरे तैयार किये थे। वहीं से
540 :: सम्भाजी