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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 541, कुल 793 में से

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पृष्ठ 541

की शंका ठीक निकली। शम्भुमहाराज ने येसूबाई पर रुष्ट होते हुए कहा, “रसद
की गाड़ियाँ तो दूर ही रहीं, अपने बहनोई हरजी पन्त तो अब स्वयं को जिंजी-
कर्नाटक का सार्वभौम राजा मानने लगे हैं। वे स्पष्ट रूप से कहने लगे हैं कि
'रायगढ़ की मुख्य सत्ता से हमारा कुछ लेना देना नहीं है'।”
येसूबाई ने सिर नीचे झुका लिया। उन्होंने कहा, “अम्बिका दीदी के भरोसे
पर मैंने उनकी सिफारिश की थी। मुझे क्षमा करें।”
हरजी राजा की ओर से आये असहयोगात्मक समाचार से महारानी बहुत
बेचैन हो गयी थीं। वे महाराज से पूछने लगीं, “महाराज दो चार महीने पहले
आपने स्वयं यहाँ की कठिनाइयों को हरजी राजा से बताया था। हरजी राजा कुशाग्र
बुद्धि, शूरवीर, पराक्रमी व्यक्तियों के कुशल संग्राहक हैं। हमारे राज्य के कठिनाई में
होने पर भी उन्हें ऐसी दुर्बुद्धि कैसे आयी?”
“याद रखिये रानी साहिबा, एक मराठा दूसरे मराठा को कभी अच्छा नहीं
लगता। यदि कोई कष्ट उठाकर यश प्राप्त करता भी है तो उसका श्रेय उसकी झोली
में डालने की उदारता भी हममें नहीं होती। अन्यथा जब एक ओर औरंगजेब जैसा
अजगर हमारे स्वराज्य के पास कुंडली मार कर बैठा हो और दूसरी ओर अकाल की
भट्ठी में प्रदेश जल रहा हो तो ऐसे समय में हरजी राजा जैसे समझदार पुरुष के मन
में ऐसे विचार क्यों आने चाहिए?”
खंडो बल्लाल, निलोपन्त पेशवा आदि सभी बड़े तनाव से गुजर रहे थे। येसू
महारानी ने एक दूसरी शंका व्यक्त की, “महाराज अकाल और अभाव से निपटने के
लिए जिंजी हमारी एकमात्र आशा है। वहाँ से सहायता नहीं आएगी तो अनर्थ हो
जाएगा।”
“आएगी, जरूर आएगी, महारानी! आखिर हमारी धमनियों में भी शिवाजी
महाराज का रक्त है। जो ईमानदारी से परिश्रम करता है उसे धन्यवाद देना और जो
टेढ़े चलते हैं उन्हें ठीक रास्ते पर ले आना हम अपने पिताजी से सीख चुके हैं।”
मोरोपन्त पिंगले के छोटे भाई केसो त्रिमल पिंगले कुछ समय पहले ही
रामसेज किले से रायगढ़ आये थे। उन्हें शम्भूमहाराज ने पुराने और अनुभवी सरदार
के रूप में सहायता के लिए बुलाया था। केसो त्रिमल का आदर-सत्कार करते हुए
महाराज ने कहा, “केसो काका, उधर जिंजी में यानी हमारे ही राज्य के एक प्रदेश
में ऐश्वर्य की गंगा बह रही है और यहाँ अकाल की छाया में हमारे लोग और
जानवर तड़प तड़पकर मर रहे हैं।”
“महाराज आज्ञा करें।” केसो त्रिमल ने सिर झुकाकर कहा।
“किले के नीचे मैदानी जमीन पर अठारह हजार घोड़े खड़े हैं। उन्हें साथ
लेकर रात-दिन चलते हुए जल्दी से-जल्दी जिंजी पहुँच जाइए।”
सम्भाजी :: 539