छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 239, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंरुके। देव-देव करते पीछे आते हुए काशी पंडित ने इन विशिष्ट लोगों को भोजन का
निमन्त्रण दिया था। राज्याभिषेक के अवसर पर गोवा के डिचोली से वहाँ के सूबेदार
मोरो दादा आये थे। वे आते समय महाड से चाँदी का मुकुट लेते आये थे। इसलिए
अण्णाजी और उनके साथियों को खरीद करने की जहमत नहीं उठानी पड़ी थी।
भोजन समाप्त हुआ। काशी पन्त की हवेली मे लोग आधीरात गप्प लड़ाने के
लिए बैठे। वहाँ से रायगढ़ का बालेकिला, राजगृह और पीछे अष्टप्रधानों के आवास
दिखाई पड़ रहे थे। राजगृह का सारा परिसर प्रकाश से लकलका रहा था।
थोड़ी देर बाद उस प्रकाश सज्जा की ओर देखते हुए राहुजी बोले,
"हिरोजी, पेशवाओं के बाड़ों के बाईं ओर वह तैयार किया हुआ बाड़ा देखा?"
"बताइए, किसका है?"
"शम्भूराजा ने ही बनवाया है, किन्तु अपने लिए नहीं, ब्रजभाषा पंडित
कविगज कलुष के लिए, भई।"
हिरोजी कुछ अजीब-सा चेहरा बनाकर बोला, "जाने दो राहुजी, एक मित्र
तो मित्र का ध्यान रखेगा ही।"
"भाई हिरोजी, तुम्हारे इस ठंडे खून पर मुझे बहुत क्रोध आता है। कैसा भी
क्यों न हो? आप शहाजी महाराज की सन्तति हैं। आप रिश्ते मे बड़े महाराज के
बन्धु और सभा के चाचा ही हैं न?"
"जाने दो राहुजी।"
"क्यों जाने दें? कौन है? किस जाति का है? गंगा के किनारे से आया यह
भड़भूजा। उसके लिए शम्भूराजा ने बाड़ों में व्यवस्था करवाई और अपने चाचा के
लिए होली के मैदान के उधर एक साधारण सा दुमंजिला मकान, यह भी कोई
न्याय है?"
बहुत देर से चुप बैठे अण्णाजी हँसते हुए बोले, "यार हिरोजी, तुम्हारे द्वारा
किये गये उपकार क्या अनदेखा करने योग्य है? आगरा से बड़े महाराज जब निकले
तो अपनी जगह पर उन्होंने तुम्हें बिस्तर में सुला दिया था। कितना धोखा था? तुम
तो मर ही गये थे। इतने बड़े त्याग का यह उपहार?"
हिरोजी का मस्तिष्क अब चक्कर खाने लगा। उन्होंने सामने रखे मदिरा के
पात्र को उठा लिया और खाली कर दिया। वे जोर से छींकते हुए बोले, "कुछ भी
हो खजाना चुराने का अपराध तो मुझसे ही हुआ था। शम्भू बेटा बड़े कलेजे का है।
उसने हमारे गुनाह पर पर्दा ही डाला न?"
"ठीक है, हम कहते हैं खजाना चुराया। लेकिन किसका खजाना? क्या
अकेले शम्भूजी राजा का? अरे भोले हिरोजी, उसमें तुम्हारा भी आधा हिस्सा है।"
राहुजी और अण्णाजी के फुलाने से हिरोजी जैसे फौजी व्यक्ति का सिर
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