छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 238, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंसम्मिलित थे। हंबीर मामा, सब कुछ निर्विघ्न रूप से सम्पन्न हो जाने के लिए
सन्तोष व्यक्त कर रहे थे।
भोजन समाप्त हुआ। पानी परसने वाले परिचारक एक ओर हो गये। महल
के पिछवाड़े छत पर अच्छी खासी भीड़ थी। हंबीर मामा से शम्भूराजा ने कहा,
"हंबीर मामा! पिताजी के समय में सिंहगढ़, राजगढ़, प्रतापगढ़ ने खूब यश
कमाया। अब हमारे शासन काल में नासिक, बगलाण की तरफ के साल्हेर,
अहिवन्त रामरोज और त्र्यम्बकेश्वर को भी कुछ नया इतिहास रचना चाहिए।"
बोलते-बोलते शम्भूराजा ठिठक गये। अपना निचला पतला ओंठ दबाते हुए
और मुट्ठियाँ भींचते हुए बोले, "यह औरंगजेब महाराष्ट्र पर चढ़ाई करेगा। ऐसा
समाचार है न ? आने दीजिए। शुरू में ही उसे ऐसा जवाब दें कि—"
हंबीर मामा हँसते हुए बोले, "शम्भू महाराज, राजा का राज्याभिषेक अर्थात्
भूमि के साथ उसका विवाह।"
"हाँऽऽ वह सब तो धार्मिक विधि का ही हिस्सा है।"
"वैसे तो कुछ नहीं, सहज ही याद आया। मारवाड़ियों के लड़कों के विवाह
में लड़के के मामा को खूब खर्च करके महँगी भेंट देनी पड़ती है। इस भेंट को
'मामेरा' कहते हैं। क्या ऐसा कह रहे हो कि तुम्हारे इस विवाह के लिए मैं भी
भरपूर 'मामेरा' दूँ?"
किन्तु मामाजी आप किस ओर संकेत कर रहे हैं? दिशा तो बताइए?"
"सूरत।" धीमी आवाज में किन्तु सभी को सुनाते हुए मामा बोले।
"तीसरी बार सूरत की लूटऽऽ?" सभी ने एक साथ प्रश्न किया।
"हाँऽऽ क्यों नहीं? अभी भी बहुत सम्पत्ति है वहाँ।"
सूरत के अभियान की अधिक चर्चा न करने की बात निश्चित की गयी शत्रु
की अनवधानता में आक्रमण करना उचित होगा। किन्तु इस नयी योजना की बात
बहुत लोगों को अवगत हो गयी।
जगदीश्वर की पूजा पूर्ण होने में रात को बहुत विलम्ब हो गया। अण्णाजी
दत्तो और हिरोजी फर्जन्द देवता को चाँदी का मुकुट चढ़ाकर मुक्त हुए। कुछ महीने
पहले राजबन्दी के रूप में वे जब रायगढ़ की सीढ़ियाँ चढ़ रहे थे तो उन्हें एक-एक
कदम पर आभास हो रहा था कि फाँसी के तख्ते पर ही जा रहे हैं। उसी समय
उन्होंने मन्नत मानी थी कि यदि बच जाएँगे तो जगदीश्वर को चाँदी का मुकुट
चढ़ाएँगे। उनकी जान ही नहीं बची बल्कि शम्भूराजा ने उनके सारे अपराध माफ
करके उन्हें पुनः अष्टप्रधानों में सम्मिलित कर लिया।
पूजन-अर्चन समाप्त हुआ। राहुजी सोमनाथ ने नौकरों को आगे जाने के लिए
कहा। अण्णाजी और राहुजी की पालकियाँ और हिरोजी का घोड़ा ब्राह्मणबाड़ी में
236 :: सम्भाजी