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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 201, कुल 793 में से

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पृष्ठ 201

वे पन्हालगढ़ के किलेदार को इस तरह का गुप्त पत्र भेजते?"
"महाराज! हुकुमनामे की लिखावट चिटणीस की नहीं थी, वह उनके बेटे
आवजी बाबा की थी।"
येसूबाई का प्रतिवाद शम्भूराजा सहन न कर सके। उन्होंने कठोर दृष्टि से
येसूबाई की ओर देखा। उन्होंने कहा, "बोलो मत! बालाजी काका की गैरहाजरी
में आवजी के हस्ताक्षर और उनकी मुद्रा चलती है। यह बात स्वराज्य साढ़े तीन सौ
गड़करियों और असंख्य कर्मचारियों को अच्छी तरह मालूम है।"
"मेरा मन अभी भी यही कह रहा है कि इस हुक्मनामे में बालाजी चाचा की
सम्मति नहीं होगी।"
संभाजी का स्वभाव था कि वे जिससे प्रेम करते थे। पूरी भक्ति और निष्ठा के
साथ करते थे। बालाजी आवजी और राजपरिवार में प्रगाढ़ स्नेह था। चिटणीस के
साथ यह स्नेह सम्बन्ध शिवाजी महाराज और संभाजी ने अच्छी तरह निभाया था।
ऐसी स्थिति में बालाजी का दिया गया धोखा संभाजी को बहुत अखर रहा था।
कर्मचारियों के षड्यन्त्रों और असहयोग से राज्य का वातावरण बिगड़ गया
था। इसलिए शम्भुमहाराज बहुत व्यथित थे। धीरे धीरे वातावरण बदल रहा था।
साधारण सिपाहियों के लिए शम्भुमहाराज नाक के बाल थे। इस बीच राजधानी
रायगढ़ पाचाण महाड पोलापुर से लेकर कोंकण पट्टी तक और घाटी में रहने वाली
सामान्य जनता भी विद्रोह कर उठी थी। शिवाजी के पुत्र का प्रकृति प्रदत्त
उत्तराधिकार नकारा जा रहा था। राज्य के कर्मचारी षड्यन्त्र रच रहे थे। राजा के
अधिकारों को छीना जा रहा था। इसलिए प्रजा क्रुद्ध हो गयी थी।
इतना ही नहीं सन्तप्त जनता ने 16 मई, 1680 के दिन मोरोपन्त और
अण्णाजी दत्तो के घर धावा बोला। दोनों के घर लूट लिए। इन विद्रोहियों ने रायगढ़
पर क़ब्ज़ा करके संभाजी के पास पन्हालगढ़ पर सन्देश भेजा—'महाराज जल्दी
आइए।'
बदली हुई परिस्थिति ने शम्भुमहाराज में नया उत्साह और जोश भर दिया।
उन्होंने एक ही समय में अनेक कार्यों को कर लेने की योजना बनाई। श्रृंगारपुर दूत
भेजकर अपने ससुर पीलाजी को दस हजार की सेना लेकर रायगढ़ पहुँचने की
प्रार्थना की। साथ ही हंबीरराव के नेतृत्व में पाँच हजार की नयी फौज तैयार की।
अपनी फौज को दो महीने का अग्रिम वेतन दे दिया। मावल के चौबीस और नेरा
छत्तीस गाँवों में शम्भूराजा का सन्देश गया। तबेलों से हिनहिनाते घोड़ों को बाहर
निकालकर लोग भाले-तलवार नचाते हुए पन्हालगढ़ की ओर बढ़ने लगे।
चिन्ताएँ मिट रही थीं। पेंच खुल रहे थे। रुकावटों के लिए नये निकल रहे थे,
शम्भूराजा की गद्दी के सामने के उद्यान में भाँति भाँति के फूल खिल रहे थे।
सम्भाजी :. 199