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चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation

महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished639 पृष्ठ

पृष्ठ 547, कुल 639 में से

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पृष्ठ 547

अ० ५ ] २४ विमानस्थानम् ५२६
व्यायामादतिसंक्षोभादस्थ्नामविविघट्टनात् ।
अस्थिवाहिनी दुष्यन्ति वातलानां च सेवनात् ॥ २३ ॥
उत्पेषणादत्यभिष्यन्दादभिघातात्प्रपीडनात् ।
मज्जवाहीनि दुष्यन्ति विरुद्धानां च सेवनात् ॥ २४ ॥
अकालयोनिगमनान्निग्रहादतिमैथुनात् ।
शुक्रवाहीनि दुष्यन्ति शस्त्रक्षाराग्निभिस्तथा ॥ २५ ॥
मूत्रितोदक-भक्ष्य-स्त्री-सेवनान्मूत्रनिग्रहात् ।
मूत्रवाहीनि दुष्यन्ति क्षीणस्याभिक्षतस्य च ॥ २६ ॥
विधारणादत्यशनादजीर्णाध्यशनात्तथा ।
वर्चोवाहीनि दुष्यन्ति दुर्बलाग्नेः कृशस्य च ॥ २७ ॥
व्यायामादतिसंतापाच्छीतोष्णाक्रमसेवनात् ।
स्वेदवाहीनि दुष्यन्ति क्रोधशोकमयैस्तथा ॥ २८ ॥
प्रकुपित होने के कारण—धातु-क्षय से, उपस्थित वेगों को रोकने से, रूक्षता
से, भूख लगे होने पर व्यायाम करने से और अन्य कठिन कार्यों से प्राणवाही
स्रोत कुपित होते हैं ।
गरमी से, आम-दोष से, भय से, बहुत पानी पीने से, शुष्क अन्न (चने
आदि) के अधिक सेवन से और प्यास को ज़बर्दस्ती रोकने से उदकवाही
स्रोत कुपित होते हैं ।
मात्रा का अतिक्रमण करके भोजन करने से, अप्राप्त या अतीत काल में
भोजन करने से, अपथ्य भोजन के सेवन से और जाठराग्नि के मन्द होने से
अन्नवह स्रोत कुपित होते हैं ।
गुरु, शीत, अतिस्निग्ध पदार्थों के बहुत अकिध सेवन करने से, चिन्ता
करने योग्य वस्तुओं को बहुत अधिक चिन्ता करने से रसग्राही स्रोत दूषित
होते हैं ।
जलन पैदा करने वाले, स्निग्ध, गरम और तरल खान-पान के सेवन और
धूप और वायु का सेवन करनेवाले पुरुषों के रक्तवाही स्रोत दूषित होते हैं ।
दोष, धातु, मल और स्रोतों में कफ बढ़ाने वाले, स्थूल और गुरु (भारी)
पदार्थ खाकर दिन में सोनेवालों के मांसवाही स्रोत दूषित होते हैं ।
व्यायाम के न करने से, दिन में सोने से, चर्बी वाले पशुओं के मांस
(सुअर का मांस) के अधिक सेवन से, मद्य के अधिक पीने से मेदोवाही स्रोत
दूषित होते हैं ।
अधिक व्यायाम से, अति संक्षोभ से, चोट आदि से, अस्थियों के अधिक