चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)
Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation
महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( १२ )
अष्टमोऽध्यायः
( पृ० ५१५-६१८ )
रोगभिषग्जितीयम्—शास्त्रप-
रीक्षा। शास्त्र के गुण। आचार्य का
लक्षण। शास्त्र को दृढ़ करने के उपाय
शास्त्र के अध्ययन की विधि ! अध्या-
पन-विधि। गुरु शिष्य के परस्पर
कर्त्तव्य। दीक्षा। आचार्य का शिष्य
को उपदेश। संभाषा-विधि। तद्विद्य-
संभाषा। (संधाय) अनुलोम संभाषण
विगृह्य संभाषा। प्रतिवादी के तीन
प्रकार। तीन प्रकार की परिषद्।
प्रतिवादी को निग्रह करने के उपाय :
प्रतिलोम संभाषण का प्रकार। वाद
की मर्यादा। ४४ आवश्यकीय ज्ञातव्य-
वाद का लक्षण। जल्प वितण्डा।
प्रतिज्ञास्थापना, प्रतिष्ठापन, हेतु,
उत्तर, दृष्टान्त। सिद्धान्त ४ प्रकार के।
शब्द प्रत्यक्ष अनुमान ऐतिह्य औपम्य
संशय प्रयोजन सव्यभिचार। जिज्ञासा
व्यवसाय। अर्थप्राप्ति, अनुयोज्य।
अननुयोज्य अनुयोग प्रत्यनुयोग वाक्य-
दोष न्यून अधिक अनर्थक अपार्थक
विरुद्ध। वाक्यप्रशंसा। छल सामान्य-
छल वाक् छल अहेतु तीन प्रकार के
प्रकरणसम संशयसम वर्ण्यसम। अतीत
काल उपालम्भ परिहार। प्रतिज्ञाहानि
अभ्यनुज्ञा हेत्वन्तर अर्थान्तर। निग्रह-
स्थान। कारण करण कार्ययोनि-कार्य-
कार्यफल। अनुबन्ध, देश, काल, उपाय
प्रवृत्ति आदि के सम्बन्ध में विशेष
विज्ञान। इनकी परीक्षा। दश विध
परीक्षा। कारण-परीक्षा। करण-परीक्षा
कार्ययोनि-परीक्षा-कार्य-कार्यफल-परीक्षा।
अनुबन्ध-देश कार्य-देश आदि की व्या-
ख्या। आतुर परीक्षा। प्रकृति आदि
भाव। श्लेष्मप्रकृति। पित्तप्रकृति।
वातप्रकृति। समधातुप्रकृति। विकृतियों
से परीक्षा। सार से परीक्षा शरीर रचना
से परीक्षा। प्रमाण से परीक्षा। तीन
प्रकार के प्रमाण। सात्म्य से परीक्षा।
बल से परीक्षा। आहार से व्यायाम-
शक्ति से परीक्षा। वयस् से परीक्षा।
काल का विवेचन संवत्सर। रोगी की
दशा के अर्थ में काल की अपेक्षा से
काल, अकाल। प्रवृत्ति। उपाय। परीक्षा
का प्रयोजन। वमनोपयोगी द्रव्य।
विरेचन द्रव्य। रसों की अपेक्षा से
द्रव्यों का वर्गीकरण। मधुरस्कन्ध।
अम्लस्कन्ध। लवणस्कन्ध। कटुक-
स्कन्ध। तिक्तस्कन्ध। कषायस्कन्ध।
६ हों वर्गों के उपयोग में वैद्य का
कर्त्तव्य। अनुवासना द्रव्य शिरोविरेचन-
द्रव्य। उपसंहार। इति विमानस्थानम्॥