अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)
Amar Shaheed Chandrashekhar Azad
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कहा कि उन्होंने हमें बम फेंकते हुए देखा, उन्हें यह सफेद झूठ बोलने में
कोई झिझक नहीं आई। हम आशा करते हैं कि जिन लोगों का ध्येय न्याय
की शुद्धता तथा निष्पक्षता की रक्षा करना है, वे इन तथ्यों से स्वयं निष्कर्ष
निकाल लेंगे।
प्रथम प्रश्न के उत्तरार्द्ध का उत्तर कुछ विस्तार से देना होगा, जिससे
कि हम उन प्रयोजनों और परिस्थितियों को एक पूर्ण और सुलझे रूप में
स्पष्ट कर सकें, जिनके फलस्वरूप यह घटना हुई, जिसने अब ऐतिहासिक
रूप ले लिया है। जेल में हमसे कुछ पुलिस के अधिकारियों ने मुलाकात की,
उनमें से कुछ ने जब हमें यह बताया कि विचाराधीन इस घटना के पश्चात्
दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को सम्बोधित करते हुए लार्ड इरविन ने
यह कहा कि हम लोगों ने बम फेंककर किसी व्यक्ति पर नहीं, अपितु स्वयं
एक संविधान पर आक्रमण किया है, तब हमें प्रतीत हुआ कि इस घटना के
महत्त्व का सही मूल्यांकन नहीं किया गया है।
मानवमात्र के प्रति हमारा प्रेम किसी से कम नहीं है। अतः किसी व्यक्ति
के प्रति विद्वेष रखने का प्रश्न ही नहीं उठता। इसके विपरीत हमारी दृष्टि
में मानव-जीवन इतना पवित्र है कि उसका वर्णन शब्दों में नहीं किया जा
सकता।
हमारा लक्ष्य उस संस्था के प्रति अपना व्यावहारिक प्रतिरोध प्रकट
करना था, जिसने अपने आरम्भ से ही न केवल अपनी निरुपयोगिता का,
अपितु हानिकारक दूरगामी शक्ति का भी नग्न प्रदर्शन किया है। हमने
जितना अधिक चिन्तन किया है, हम उतने ही अधिक इस नतीजे पर पहुंचे
हैं कि इस संस्था (असेम्बली) के अस्तित्व का उद्देश्य दुनिया के सामने
भारत की गरीबी तथा असहायता का प्रदर्शन करना है तथा यह एक