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अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

Amar Shaheed Chandrashekhar Azad

सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा

DevanagariHindipublished148 पृष्ठ

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पृष्ठ 79

82 चन्द्रशेखर आजाद

के पीछे का तीसरा डिब्बा उड़ गया।
इस घटना से फिर तहलका मच गया। पुलिस पहले ही सतर्क थी;
अब और भी अधिक बौखला उठी, उसने अपने प्रयत्न पहले से भी तेज कर
दिये।
कांग्रेस के सन् 1930 के लाहौर अधिवेशन में प्रथम बार एक ओर
भारत के लिए पूर्ण स्वराज्य की मांग की गई, वहीं दूसरी ओर इस घटना
की निन्दा की गई। इसके मुख्य अंश इस प्रकार हैं—
"यह कांग्रेस वाइसराय की ट्रेन पर बम विस्फोट के कृत्य की निन्दा
करती है और अपना यह निश्चय फिर प्रकट करती है कि इस प्रकार के
कार्य न केवल कांग्रेस के उद्देश्यो के प्रतिकूल हैं, अपितु उनसे राष्ट्रीय हित
की हानि होती है। यह कांग्रेस महामहिम वाइसराय, श्रीमती इर्विन तथा
गरीब नौकरों सहित उनके साथियों का इस बात के लिए अभिनन्दन करती
है कि वे सौभाग्य से बाल-बाल बच गए।"
वाइसराय की ट्रेन को बम से उड़ाने का प्रयत्न असफल हो जाने के बाद
भी चन्द्रशेखर आजाद के नेतृत्व में दल क्रियाशील बना रहा। इसके बाद
भी कई जगह बम विस्फोट हुए, डकैती तथा हत्या की योजनाएँ बनीं, किन्तु
इन सभी योजनाओं में कोई विशेष सफलता नहीं मिली। पुलिस इस दल के
सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए हाथ धोकर पीछे पड़ी थी। अगस्त, 1930
में इस दल के चार सदस्य—रूपचन्द, इन्द्रपाल, जहांगीर लाल तथा कुन्दन
लाल गिरफ्तार कर लिये गए। इसके बाद कुछ और सदस्य पकड़ लिये
गए; कुल छब्बीस सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, किन्तु दल के
अध्यक्ष चन्द्रशेखर आजाद, यशपाल, सुशीला दीदी, दुर्गा भाभी, हंसराज
तथा प्रकाशवती आदि पुलिस की पकड़ में नहीं आ सके। अतः उन्हें फरार
घोषित कर दिया गया।
सुखदेवराज भी पुलिस की पकड़ में नहीं आये थे। सभी फरार अभि-
युक्तों की खोज में पुलिस के मुखबिर घूमने लगे थे। एक दिन पुलिस को
सूचना मिली कि सुखदेवराज किसी अन्य युवक के साथ लाहौर के शाली-
मार पार्क में हैं। अतः पुलिस ने घेरा डाल दिया। यहाँ सुखदेवराज का तो
.......रार नामक एक युवक गोली से पुलिस के