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अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

Amar Shaheed Chandrashekhar Azad

सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा

DevanagariHindipublished148 पृष्ठ

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पृष्ठ 129

130 चन्द्रशेखर आजाद
शिक्षा देने के लिए किसी पाठशाला में भेजने में भी असमर्थ थे। दल के
सन्दर्भ में उनकी इसी निर्धन पारिवारिक स्थिति का वर्णन करते हुए
भगवानदास ने लिखा है—
"आजाद के साथियो यानी उनके नेतृत्व में काम करने वालो में शायद
ही किसी को उनसे कम स्कूली शिक्षा मिली होगी। शायद ही कोई उनसे
अधिक गरीबी की हालत में उत्पन्न हुआ होगा। उनके साथ उनके पिता,
भाई या किसी अन्य सम्बन्धी की देशभक्ति, त्याग, तपस्या, वीरता या
अन्य किसी प्रकार के बड़प्पन की छाया भी नही लगी हुई थी।"
इसी विषय में श्री मन्मथनाथ गुप्त ने भी लिखा है—
"इनके पिता पं० सीताराम बहुत मामूली नौकरी करते थे, इसलिए
अंग्रेजी पढ़ने का कोई प्रश्न ही नहीं उठा। आजाद संस्कृत पढ़ने के लिए
काशी भेजे गए... ब्राह्मण विद्यार्थी थे इस कारण खाने-पीने तथा रहने
की मामूली व्यवस्था हो गई। काशी में धार्मिक लोगों की ओर से संस्कृत
छात्रों के लिए छात्र निवास तथा क्षेत्र खुले हुए थे। कभी-कभी लोटा-
कम्बल ऐसी चीजें भी बँटती रहती थीं। कभी-कभी कुछ दक्षिणा भी
मिलती थी।"
इन विद्वानों की उपर्युक्त पंक्तियों से आजाद के परिवार की तथा उन
परिस्थितियों की, जिनका सामना उन्हें अपने बाल्यकाल में तथा अध्ययन
के दिनों में करना पड़ा था, स्पष्ट अभिव्यक्ति हो जाती है। किन्तु आजाद
ने सिद्ध कर दिखाया कि इस प्रकार की स्कूली शिक्षा ही सब कुछ नहीं
है। व्यक्ति की पारिवारिक स्थिति चाहे कितनी ही दयनीय क्यों न हो
और चाहे उसे वर्षों की शिक्षा न मिली हो, इससे उसकी अपनी जन्मजात
योग्यता छिपी नहीं रह सकती। इनके न होने पर भी व्यक्ति अपनी
योग्यता के बल पर उन्नति के चरम शिखर पर पहुँच सकता है, एक
आदर्श प्रस्तुत कर सकता है, जिसके आगे बड़े-बड़े धनवानों एवं सुशिक्षितों
को नतमस्तक हो जाना पड़ता है। इसी तथ्य की ओर संकेत करते हुए श्री
मन्मथनाथ गुप्त ने आजाद के विषय में लिखा है—
• "अवश्य चन्द्रशेखर आजाद कम पढ़े-लिखे, केवल स्थूल साहित्य के
दृष्टि से ही थे, पर उनके पढ़े हुए पुस्तकों का सार ग्रहण करने..."