अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)
Amar Shaheed Chandrashekhar Azad
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सिनेमा देखते पकड़ा जाएगा और अकाल मारा जाएगा। इसके उत्तर
में भगतसिंह ने कहा कि उसे (आजाद को) मारना भी पुलिस के लिए
आसान नहीं होगा, क्योकि इतनी मोटी गर्दन को फाँसी पर लटकाने के
लिए पुलिस को रस्सा भी नहीं मिल पायेगा। एक रस्से से काम भी
नहीं चलेगा; दो रस्सों की जरूरत पड़ेगी—एक गले के लिए; एक पेट के
लिए। इस पर आजाद ने अपने पिस्तौल पर हाथ रखते हुए कहा था,
इसके होते हुए कौन माई का लाल है, जो मुझे गिरफ्तार कर सके।"
• एक बार कुछ लोगों ने उन्हें सलाह दी थी कि क्रान्तिकारी दल
बिखर चुका है, इसलिए उन्हें भागकर रूस चला जाना चाहिए, क्योकि
पकड़े जाने पर उनके लिए फाँसी निश्चित थी। यह सुनकर आजाद ने
कहा था—"रूस-फूस की बातें मेरे साथ मत करो। मेरा शरीर भारत की
मिट्टी से बना है और मैं भारत की आजादी के लिए शत्रु से लड़ते-लड़ते
इसी देश की धरती पर मरकर इसकी धूल में मिल जाऊँगा।"
• एक बार आजाद अपने साथियो—भवानीसिंह, रामचन्द्र, मास्टर
छत्रबिहारीलाल, विश्वम्भर दयाल आदि के साथ लैंसडाउन गए हुए थे
और पहाड़ियो पर उन्हें निशाना लगाने का प्रशिक्षण दे रहे थे। इतने
में साथियों ने उनका (आजाद का) निशाना देखने की इच्छा व्यक्त की
क्योकि उनका निशाना अचूक था। आजाद ने उनकी इच्छा को मान
लिया। साथियो ने किसी पेड़ के एक पत्ते पर निशाना लगाने को कहा।
आजाद ने निशाना लगाया और पाँच गोलियाँ चला दीं, किन्तु पत्ता नहीं
गिरा। साथियों को बड़ी निराशा हुई और उन्होंने समझ लिया कि निशाना
चूक गया। अन्त में पत्ता तोड़ा गया, उसमें पाँचों गोलियों के अलग-
अलग पाँच छिद्र बने हुए थे। यह देखकर उनके साथी उनकी प्रशंसा किए
बिना नहीं रह सके।