अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)
Amar Shaheed Chandrashekhar Azad
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संदर्भ में पढ़ेंप्रथम अध्याय
प्रारंभिक जीवन
इस राष्ट्र के निर्माण में; इसकी स्वतन्त्रता के लिए न जाने कितने
वीरों ने अपने प्राणों का बलिदान किया, उनमें से अनेक वीरों के नाम भी
ज्ञात नहीं हैं। जिन क्रान्तिकारी वीरों के नाम ज्ञात भी हैं, उन्हें भी आज
हम भूल जैसे गये हैं, उनके नाम केवल इतिहास की पुस्तकों तक ही सीमित
रह गये हैं। भारतीय स्वतन्त्रता का इतिहास सन् 1857 की क्रान्ति से ही
प्रारम्भ होता है। यद्यपि स्वतन्त्रता के इस पहले संग्राम को अंग्रेजों ने असफल
कर दिया था, फिर भी दासता की जंजीरों में बंधे भारतीयों को इससे जो
प्रेरणा मिली, उसी प्रेरणा ने उन्हें स्वतन्त्रता के लिए लगातार प्रयत्न करने
की शिक्षा दी। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के बाद भले ही इस
दल ने स्वतन्त्रता-प्राप्ति के लिए अहिंसक आधार पर स्वतन्त्रता की लड़ाई
लड़ी, आज सारा श्रेय कांग्रेस को ही दिया जाता है। किन्तु कांग्रेस के साथ
ही भारत के क्रान्तिकारी सपूतों ने भी अंग्रेजों के विरुद्ध समानान्तर रूप
से युद्ध किया। अंग्रेज सरकार के लिए ये क्रान्तिकारी एक चुनौती बन गये
थे। हिंसा के माध्यम से विदेशी शासकों को देश से निकाल बाहर करना
और मातृभूमि को स्वतन्त्र कराना ही इनका लक्ष्य था।
भयंकर विपत्तियों का सामना करते हुए, सभी सुख-सुविधाओं को
त्यागकर, अपने प्राणों की परवाह न करके भारतीय वीर क्रान्तिकारी अपने
पावन कार्य को आगे बढ़ाते रहे। इन्हीं वीरों में एक नाम वीर शिरोमणि
अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद का भी है, जिन्होंने मातृभूमि की स्वतन्त्रता
के लिए अपना जीवन भी बलिदान कर दिया। यहाँ इसी वीर का जीवन-
चरित्र प्रस्तुत किया जा रहा है।