चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
पृष्ठ 94, कुल 520 में से
संदर्भ में पढ़ें१३०-दूतोंका लौटना और सीहका मारा जाना; १३१-सिंगार-बाँठा युद्ध
१३२-ब्रह्मदत्तका मारा जाना; १३३-घमूँछा युद्ध करना १३४-रुपपतिको
युद्ध करना; १३५-मैदानमें सैन्य सहित बाँठाका आना; १३६-बाँठाके मुकाबिले
लोरकका आना १३७-लोरक-बाँठा युद्ध १३८-रूपचन्दका मातासे परामर्श
१३९-बाँठाका उत्तर; १४०-लोरक-रूपचन्द युद्ध १४१-बाँठाका मारा जाना;
१४२-लोरकका रूपचन्दकी सेनाको खदेड़ना १४३-युद्धके मैदानमें मुदामोर
फगुण्डी।
चाँदका लोरकपर मुग्ध होना—
१४४-विश्वमोहमन्त्र और लोरकका हुस्न १४५-चाँदका दुग्ध देखना
१४६-लोरकका रूप-वर्णन १४७-लोरकको देखकर चाँदका मूर्छित होना;
१४८-बिरहपतका चाँदको समझाना १४९-बिरहपतका लोरकको घर बुलानेका
उपाय बताना; १५०-चाँदका पितासे जेवनारके आयोजनका अनुरोध।
ज्योनार—
१५१-ज्योनारका आयोजन १५२-अहेरियाँका अहेर जाना १५४-पक्षियोंका
पकड़ कर लाया जाना; १५५-भोजनकी व्यवस्था; १५६-तरकारी वर्णन १५७-
पकवानका वर्णन; १५८-पापड़ोंका वर्णन १५९-रोटीका वर्णन १६०-कन
पत्रका वर्णन १६१-निमंत्रितोंका बैठना १६२-व्यंजनोंका परसा जाना।
चाँदके प्रति लोरकका आकर्षण—
१६३-मेजके समय लोरकका चाँदको देखना; १६४-लोरकका घर आकर
खाटपर पड़ रहना; १६५-लोरककी माँका विलाप; १६६-बिरहपतका लोरकके
घर आना १६७-बिरहपतका लोरकको देखना १६८-लोरकका विरहस्तसे
चाँद-स्थानकी बात कहना १६९-बिरहपतका लोरकको समझाना; १७०-
लोरकका बिरहपतके पाँव पकड़कर अनुनय करना; १७१-बिरहपतका उपाय
बताना १७२-हिरहस्तका लौटना १७३-विरहस्तका चाँदके पास आना।
लोरकका योगी रूप-धारण—
१७४-लोरकका योगी होना; १७५-चाँदका मन्दिरमें आना १७६-चाँदका
मुखाहार टूटना; १७७-चाँदको पागीकी सूचना मिलना; १७८-चाँदका योगीको
प्रणाम करना और योगीका मूर्छित होना १७९-चाँदका मन्दिरसे घर लौटना,
१८१-लोरकका पश्चाताप; १८२-देवताका उत्तर।
चाँद और लोरककी व्याकुलता—
१८४-चाँदका बिरहपतसे प्रेमके प्रति निराशा; १८५-बिरहपतका उत्तर; १८६-
चाँदका बिरहस्तसे क्षोभ; १८७-बिरहस्तका चाँदसे लोरकके मोहित होनेकी बात
कहना १८८-चाँदका खेद प्रकट करना; १८९-बिरहस्तको लोरकके पास