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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

DevanagariAwadhipublished520 पृष्ठ

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(ग) वावको शब्दके आरम्भमें सर्वत्र व और अन्तमें आने वालेको प्रायः
उके रूपमें ग्रहण किया गया है।
(घ) शब्दके आरम्भमें आये अलिफ़को अ, आ, इ और उके रूपमें और
येको एके रूपमें ग्रहण किया गया है।
(ङ) शब्दके आरम्भमें अलिफ़ और येके संयुक्त प्रयोगको ए और ऐकी
अपेक्षा अइके रूपमें पढ़ा गया है।
(च) शब्दके आरम्भमें अलिफ़ और वावके संयुक्त प्रयोगको प्रसङ्गानुसार
ऊ, ओ, औ अथवा आउ पढ़ा गया है। शब्दके अन्तमें आनेपर उसे केवल आउ
माना गया है।
(छ) वंश आदि शब्दोंके अन्तमें वाव और येके संयुक्त प्रयोगको प्रसङ्गा-
नुसार वे अथवा वै पढ़ा गया है किन्तु विचारमार्गमें हमें वेकी अपेक्षा वइ पाठ अधिक
संगत और उचित जान पड़ा है।
● यदि गृहीत प्रतिके पाठमें कहीं कोई छूट या अभाव है तो वह दूसरी
प्रतिसे लेकर पूर्ण किया गया है। इस प्रकार दूसरी प्रतिसे ग्रहण किये हुए पाठको बड़े
कोष्ठक--[ ] में दिया गया है।
● यदि छूटे हुए पाठकी पूर्ति अनुमानसे की गयी है तो उसे बड़े
कोष्ठक [ ] में रखकर तारांकित कर दिया गया है।
● छूटे हुए पाठकी पूर्ति यदि किसी प्रकार सम्भव नहीं हो सका है तो वहाँ
बड़े कोष्ठक [ ] के भीतर अनुस्वार-मात्राओंके अनुसार डैश रख दिये गये हैं।
यदि कहीं लिपिकने प्रमादवश किसी शब्दको दुहरा दिया है तो ऐसे शब्दको
तारांकित कर दिया गया है। यदि उसने कोई अनपेक्षित अतिरिक्त शब्द रख दिया
है तो पाठसे उस शब्दको निकाल दिया गया है और मूल पाठ अलग संग्रह कर दिया
गया है।
● इसी प्रकार जहाँ पाठ स्पष्ट रूपसे अशुद्ध जान पड़ा तो वहाँ सम्भावित
पाठ छोटे कोष्ठक ( ) में देकर मूल पाठको अलग संग्रह कर दिया गया है।
● ऐसे शब्दोंको जिनका हम समुचित पाठोद्धार करनेमें असमर्थ रहे अथवा
जिनपर शब्द-सम्बन्धमें हमें किसी प्रकारका सन्देह है पाठके अन्तर्गत भिन्न टाइपमें
दिया गया है।
● प्रसंग बदलकर पाठके नीचे अशुद्ध मूल पाठ अथवा पाठान्तर देकर
टिप्पणी दिये गये हैं। प्रत्येक पंक्तिसे सम्बन्धित टिप्पणियाँ पंक्ति-संख्या देकर अलग
अलग की गयी हैं। इन टिप्पणियोंके अन्तर्गत शब्दोंका अर्थ, व्याख्या, आवश्यक
सूचना आदि दिया गया है। किन्तु यह कार्य खूब विस्तारसे नहीं किया जा सका।

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