चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
पृष्ठ 65, कुल 520 में से
संदर्भ में पढ़ें४८
व्याघ्र हैरान ठिठक गया । गोरखने बोला कि तुमने यह बहुत बुरा किया । और वह
उसकी भर्त्सना करने लगा । यह सुनकर चाँदेने कंवरूका समझानेकी चेष्टा की तो
कंवरू उसकी भी भर्त्सना करन लगा । अन्तमें गोरखने यह कहकर कंवरूसे विदा ली
कि कार्तिक मासतक लौट आऊँगा । (२१४ । )
१७—वहाँसे दोनों तेजीके साथ आगे बढे । जब शाम हुई तो गंगाके घाटपर
कठिन समझकर पेड़के नीचे सो रहे । सुबह दोनों पाटपर किनारे आये । (बीचके
कड़वक अप्राप्य हैं, अतः कथाका क्रम कुछ अस्पष्ट है ।) गोरख एक ओर छिप गया
और चाँद तटपर खड़ी होकर अपना प्रदर्शन करने लगी । उसे देखते ही एक मल्लाह
निकट आया । चाँदेको अरसेसे देख उसकी उत्सुकता आयी और नाव लेकर उसके
पास आया । चाँदेके रूपको देखते ही वह उसपर मुग्ध हो गया और उसे नावपर
बैठाकर पार ले चला । गंगाके बीचमें केंवटने उससे पूछा कि तुम कौन हो ? घर
कहाँ है ? नदीके आसपास कोई गाँव नहीं है फिर तुम रातको कहाँ ठहरी थीं !
चाँदेने कहा—मैं घरसे रूठकर चली हूँ और रातभर चलकर अकेली ही
यहाँतक आयी हूँ ।
यह बातें हो ही रही थीं कि गोरखने पानीमेंसे सर बाहर निकाला और केवट
को पानीमें ढकेलकर स्वयं नावपर सवार होकर चाँदेको लेकर चल पडा । ( १ १५ ७)
१८—इतनेमें बाबन आ पहुँचा और केवटसे पूछने लगा—इस रास्ते मेरे दो
दास-दासी आये हैं उन्हें तुमने देखा है ! यह सुनकर केवट हँसा और बोला—यहाँ
तो एक कुँवर और कुँवरी आये थे । पुरुष छिप गया और स्त्री दिखायी पड़ी । उसकी
ओर आकृष्ट होकर मैं वहाँ आया । वे लोग नाव लेकर उस पार गये हैं । लेकिन वे
तुम्हारे दास-दासी नहीं हो सकते । इतना सुनते ही बाबन पानीमें कूद पड़ा और
गोरखका पीछा किया । जबतक बाबनने नदी पार करे तबतक गोरख छ कोस जा
पहुँचा । बाबनने दौड़कर उनका पीछा किया और दस कोसपर उन्हें जा पकड़ा ।
गोरखपर उसने तीन बाण चलाये पर वे तीनों ही बेकार गये । तब हार मानकर
गोरखसे कहकर कि यह स्त्री तुम्हारी हुई बाबन अपने घर लौट गया । ( १ ८ ३१६)
१९—बाबन गोबरकी ओर गया गोरख और चाँद आगे बढे । रास्तेमें उन्हें
विद्यादानी नामक एक ठग मिला जिसने दानके बहाने स्त्री (चाँद) की माँग की ।
इसपर गोरखने उसके हाथ और कान काट लिये और उसका मुँह काला कर केथोंमें
मेस बाँधकर छोड़ दिया । (कुछ कड़वकोंके प्राप्त न होनेसे यह घटना बहुत अस्पष्ट है।)
(३१५ ३१२)
२०—विद्याने आकर गोरखके विरुद्ध राज दरबारमे परिवाद किया । राजाने
अपने मन्त्रियोंसे परामर्श कर गोरखकी बुलानेके लिए ब्राह्मणोंको भेजा । गोरखने
आकर राजासे सारी बात कह सुनायी । सुनकर राजाने उसे घोड़ा आदि देकर सम्मानित
किया और कहा कि चाहो तो यहाँ रहो अन्यथा जहाँ इच्छा हो जा सकते हो ।
गोरख राजासे विदा लेकर चला और एक ब्राह्मणके घर जाकर ठहरा । वहाँ गोरख