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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१—११ ११ मात्राएँ—
सेतु कसीस रोचन भार बांठ चर झांकें ।
सोवे बेचि घड़ाइ मोंविह मांग भरारें ॥ १३६
(२) ११, १२ मात्राएँ—
जे बस लाय समान सरबस बरन के ठेवे ।
और पाँखि जे मारें हाथन ताँकें को कैवे ॥ १५४
(३) १२ ११ मात्राएँ—
सिद्ध पुरुष गुन आगर देखि कुमाने झांकें ।
कहत सुजत अस आवैं, ह्वैवि फल देजी झांकें ॥ २
(४) १३, ११ मात्राएँ—
बरष बरष बोर नौहह, गिलत न भावइ काउ ।
अन घन पाट पटोर भल, कौतुक भूका राउ ॥ ३१
(५) १६ ११ मात्राएँ—
फाँड फिरोबी शाल सुरहुरी दैदै लोग बिसाह ।
हीर पटोर औ अरु कापड किन पावै सब व्याह ॥ २८
(६) १६ १२ मात्राएँ—
गीत बाइ सुर कबित कहामी कथा कहहु गानबहार ।
मोर मन रँग रँगस सुख राख मूँखसि गर्व गिरहार ॥ ७२
(७) १७ ११ मात्राएँ—
तिन संजोग बाजिर सर कोन्हों चौहठ मा परछाइ ।
राजा हियें व्यय सब बारे, तिक-तिक जरै बुझाइ ॥ ८५
इन व्यवस्थित मात्राओंवाले धत्ताके अतिरिक्त कुछ धत्ता ऐसे भी हैं जिनके
चारों चरणोंकी मात्राओंमें भिन्नता है । यथा—
११ १३ १२ ११ मात्राएँ—
सहस कराँ सुरजर्क रहे चाँदरा कित छाइ ।
घोरह कहाँ चाँद कै नई अमावस आइ ॥ १४०
इस प्रकार मात्रा भेदसे युक्त धत्ताके अनेक रूप चन्दायणमें देखे जा सकते
हैं जिनमें चरणोंकी मात्राओंमें परस्पर कोई साम्य नहीं है; पर उनका उल्लेख यहाँ जान
बूझकर नहीं किया जा रहा है । उनपर ग्रन्थकी एक आध अन्य प्रतियोंके प्राप्त होने
और उनके तुलनात्मक अध्ययन के पश्चात् ही विचार करना उचित होगा ।
जो सामग्री उपलब्ध है उससे यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि चन्दायणमें