चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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आगे बढ़नेपर चन्दाने कहा—सड़कका रास्ता छोड़कर लोटौके रास्ते चलो ।
आगे सारंगपुर गाँव है, वहाँ महीपति नामक जुआरी रहता है, जिसके साथ तीन सौ
साठ और जुआरी हैं । अगर उस रास्ते चलोगे तो वह तुम्हारा सारा धन जीत लेगा
फिर हमारे पास रास्तेके खर्चका अभाव हो जायेगा ।
चन्दाकी बात सुनकर लोरिकने कहा—तुमने महीपति जुआरीका बखान
किया । अब तो मैं जरूर उसका करतब देखूँगा ।
और वह महीपति जुआरीके घरके पास पहुँचा । जुआरियोंने उसे देखते ही
घेर लिया और बोले—इस रास्ते जो भी आता है उसे एक दाव जुआ खेलना
पड़ता है । अतः जुआ खेलकर ही आगे जा सकते हो ।
इतना सुनना था कि लोरिकने चन्दाको तो एक पेड़के नीचे बैठा दिया और
स्वयं महीपतिके संग जुआ खेलने बैठ गया । खेलते खेलते लोरिक अपना सारा धन
वस्त्र, हथियार सब कुछ हार गया । अन्तमें उसने चन्दाको ही दांवपर लगा दिया और
उसे भी हार गया । तब महीपतिने पासेको एक ओर रखकर लोरिकसे कहा—अब
मुँह क्या देखते हो । अपन रास्ते जाओ । और अपने आदमियोंसे कहा कि चन्दाको
महलमें पहुँचा दो ।
जब महीपतिके आदमी चन्दाके पास पहुँचे और उससे लोरिकके हार जानेकी
बात कही तो वह महीपतिके पास जाकर बोली—अभी एक दाव खेलनेके उपयुक्त
मेरे गहने बचे हुए हैं । अतः तुम पहले मेरे साथ एक दाव खेलो । वह खेलने बैठ
गयी । खेलते-खेलते उसने लोरिककी हारी हुई सभी चीज जीत ली और फिर महीपतिक्रा
सब कुछ जीतकर सारंगपुर गाव भी जीत लिया । फिर लोरिकसे बोली—तुम्हारी
इज्जत बच गयी । अब तत्काल हरदीके लिए चल दो । दोनों चल पड़े ।
उन्हें जाते देख महीपतिने अपने जुआरियोंको ललकारा कि जीती हुई स्त्री
लिये जा रहा है । उसे मारकर छीन लो । यह सुनना था कि जुआरी लोरिकपर टूट
पड़े । लोरिक भी उनसे गुथ गया और थोड़ी देरमें उन्हें मारकर समाप्त कर दिया ।
जुआरियोंको मारकर लोरिक चन्दाको लेकर आगे बढ़ा ।
चन्दाने आगे आनेवाले गांव कनकपुरको बतलाकर दूसरे रास्ते चलनेको कहा
पर लोरिकने उसकी बातपर ध्यान नहीं दिया और चलता ही गया । जिस समय वे
दोनों कनकपुरके निकट तालाबपर पहुँचे वे प्याससे व्याकुल हो रहे थे । वे तालाबमें
घुसकर पानी पीने लगे ।
इतनेमें तालाबके पहरेदारोंने उन्हें देखा और तालाबको जूठा करनेके कारण
उन्हें गाली देने लगे । गाली सुनकर लोरिकको गुस्सा आया और वह पहरेदारोंको
मारने लगा । पहरेदार भागकर राजाके पास पहुँचे । राजाने लोरिकको परास्त करनेके
लिए सेना भेजी । मगर लोरिकने सेनाको ही परास्त कर दिया । राजाने भागकर अपने
घर में शरण ली ।