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सर्वकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

DevanagariAwadhipublished520 पृष्ठ

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आदमी नहीं मिला जो तुम मेरे पीठपर अंगार डाल रही हो ? संसारमें न जाने कितने
कुँवारे हैं। डिक्क पड़ाकर ब्याह क्यों नहीं कर लेती ? तुम मेरे पतिको भुलाकर मेरी
सौत क्यों बन रही हो ? अभी कल तो वह मेरा गौना कराकर लाये और आज तुम
सौत बन गयी।
पन्वाका यह सुनना था कि वह मंजरीको गालियाँ देने लगी। बोली-
अपने पतिको रस्सीमें बाँध क्यों नहीं रखती !
इतना सुनते ही मञ्जरीने दौड़कर उसका केश पकड़कर लीजा और लगी उसे
पीटने । दोनोंको मारपीट करते देख भीड़ जमा हो गयी । लेकिन डरके मारे उन्हें
छुड़ानेकी हिम्मत किसीको न हुई । जिस कोयरीका खेत था, वह अपने खेतको लथा
नाथ होते देख भागा हुआ लोरिकके पास पहुँचा। सुनते ही लोरिक दौड़ा हुआ
आया । मञ्जरीने लोरिकको देखते ही पन्वाको छोड़ दिया और घर चली आयी।
लोरिक उसके पीछे-पीछे घर पहुँचा और मंजरीसे बोला-दूसरेकी बेटीका
इस प्रकार उपहास क्यों करती हो ? बात क्या हुई जो इस प्रकार तुमने पन्वाका अप-
मान किया ?
यह सुनकर मञ्जरी बोली-तुम अपने मनकी बात सच-सच कहो ! पन्वा
मुझसे किस बातमें अधिक है ? धनमें बुद्धिमें, रूपमें ? किस कारण तुम उसपर मोहित
हो गये हो ? यदि तुमको उसपर ही लुभाना था तो मुझसे विवाह ही क्यों किया !
उसीसे ब्याह कर लेते ।
लोरिकने हँसकर कहा-सब लोग खेती करते हैं यह तो तुम जानती हो।
अपने खेतमें अच्छा अनाज होते हुए भी लोग दूसरेके खेतसे कचरी उखाड़कर खाते
हैं। बस, वही तुम समझ लो । उसके साथ तो बस चित्तका आमोद-प्रमोद है। तुम तो
जीवन भरके लिए हो !
इतना कहकर लोरिक चला गया । धीरे धीरे सोमवारका दिन आया । शामको
मञ्जरी सब तरहसे निश्चिन्त फिर चुकी तब उसने अपनी साससे कहा-आज जरा
होशियार रहना। घरमें आज चोरी होनेवाली है। पन्वाको लेकर स्वामी हरदी भागने-
का इरादा कर रहे हैं।
यह सुनकर मूहकुण्डनने कही-मेरे हाथमें रुबड़ा (मोटा डंडा) दे दो
और दरवाजेपर खाट बिछा दो । दरवाजेको कचकर नहीं छोड़ूँगी। जैसे ही पन्वाकी
आवाज सुनायी देगी, वैसे ही यह रुबड़ा से मारूँगी। उसका सिर फूट जायेगा ।
मञ्जरी अपने कमरेमें आयी और लोरिकको मोचना कराकर बाहरका दरवाजा
बन्द कर दिया । फिर लोरिकसे कहा-प्रतिदिन आप बाहर सोते हैं ! आज यहीं रह
जावें । इतना कहकर वह सोनेका प्रबन्ध करने लगी । लोरिक थक गया और उसने
मँजरीके साथ बातें करके जागते ही रात बिता दी । इधर पन्वा अपने पिताके भण्डारसे
सोनेकी पिटारी उठाकर बाहर निकली। रास्तेम जहाँ-तहाँ सिन्दूरका टीका लगाती
गयी और बढ़लीके पेड़के नीचे पहुँचकर लोरिककी प्रतीक्षा करने लगी। चार प्यासी