चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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गया । सबरू कुन्दकुचेके घर बड़े लाड़-प्यारसे पलने लगा । जब वह कुछ बड़ा हुआ
तो भैंस चराने बोहा जाने लगा । बोहामें एक अखाड़ा था जिसका गुरु मितारजरुस
नामक धोबी था । भैंस चराते-चराते सबरू उस अखाड़ेमें सम्मिलित हो गया और
कुश्ती लड़ने लगा ।
एक दिन कुन्दकुच अपनी दालानमें बैठा हुआ था, तभी एक साधूने आवाज
दी—तुम्हारे बाल-बच्चे कुशलसे रहें । मुझे भूख लगी है, कुछ भोजन कराओ ।
यह सुनकर कुन्दकुचेने कहा—महाराज ! बाल-बच्चे तो मेरे हुए ही नहीं,
कुशलसे कौन रहेगा ?
साधूने यह सुनकर कहा—तुम तो बड़े भाग्यवान हो । आश्चर्य है अब तक
तुम्हें कोई सन्तान नहीं हुई । अच्छा, तुम शिवजी पूजन करो, तुम्हारी मनोकामना
शीघ्र पूरी होगी । तुम्हार प्रतापी पुत्र जन्म लेगा उसका यश संसार गायेगा । तुम
उसका नाम लोरिक मनियार रखना ।
तदनुसार पति पत्नी दोनों मनोयोगसे शिवकी अराधना करने लगे । कुछ दिनों
पश्चात् शिवने प्रसन्न होकर वर दिया—तुम्हारे महाबली पुत्र होगा । उससे लड़ने
वाला संसारमें कोई न होगा । जब वह जन्म लेगा तो सवा हाथ धरती उठ
जायगी । तदनुसार समय आनेपर कुन्दकुरनके गर्भसे लोरिकने जन्म लिया ।
पाँच बरसकी आयुमें लोरिक पाठशाला पढ़ने भेजा गया । वहाँ वह एक ही वर्षमें
पढ़ लिखकर सब प्रकार योग्य हो गया । जब वह दस वर्षका हुआ तो वह एक
दिन सँवरूके साथ बोहा गया । वहाँ सँवरू आदिको अभ्यास करते देखकर लोरिकने
भी गुरु मितारजरुसको अपना चेल बनानेको कहा । मितारजरुसने समझाया—
अभी तो तुम बच्चे हो अखाड़ेकी कठिनाइयों नहीं जानते । यदि तुम्हारा तनिक भी
अनिष्ट हुआ तो कुन्दकुचे राउल मेरी दुर्दशा कर डालंग ।
लोरिकने शिष्य बनानेके लिए हठ पकड़ लिया और बोला—जब तक आप
मुझे शिष्य नहीं बनायेंगे मैं गौरा लौटकर नहीं जाऊँगा ।
लोरिकका इस प्रकार हठ करत देखकर मितारजरुसको जब और कुछ न सूझा
तो बोले—अस्सी अस्सी मनके मुँगरा (गदा) रखे हुए हैं। यदि तुम इन्हें उठा लो
तो मैं तुम्हें अपना शिष्य बना लूँगा ।
अखाड़ेमें चार मुँगरा (गदा) रखे हुए थे । जिनमें दो अस्सी अस्सी मनके,
तीसरा चौरासी मनका और चौथा अठ्यासी मनका था । अस्सी मन वाला एक मुँगरा
मैंगवा (बटुआ) पमार भाँजता था चौरासी मन वाला मुँगरा दिलबर और अठ्यासी
मन वाला मुँगरा सँवरू भाँजता था । और अस्सी मन वाले दोनों मुँगराँको मितारजरुस
अपने दोनों हाथोंमें लेकर मांजते थे । मितारजरुसकी बात सुनकर लोरिक तत्काल उठ
खड़ा हुआ और अखाड़ेमें रखे चारों मुँगराको पुष्प समान उठाकर आकाशमें फेंक
दिया और जब वे नीचे आये उन्हें दोनों हाथोंमें पुनः पकड़ लिया । फिर चारों
मुँगराको दोनों हाथ में लेकर भाँजने लगा । यह देखकर मितारजरुस आश्चर्य चकित
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