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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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समुँद वीर कछु साथ तुम्ह चायहु । गोबर देखि पलटि घर आयहु ॥४
फाँद सिंहासन चाँद चलावा । इन्ह तखियाव फिरे हूँ (आवा) ॥५
बरद सहस एक सिन्धौ भरा । पाटन छाड़ि सींठ ऊतरा ॥५
राहु गरह यस गरहै, चाँदा मुख अँधियार ।६
मीन रासि बन बैरिन, सिरजन कै उपकार ॥७
मूलपाठ—(४) आये ।
टिप्पणी—(५) सिन्धौ—सैन्धव नमक ।
४३४
( तीर्थखण्ड ३१ )
गुशउने चाँदा लोरक रा
( चाँदका लोरकसे अनुरोध )
सवदु चाँद लोर सों कहा । पलट नीर गंगा नै वहा ॥१
फिरथि साइ सैं मा तोड़ै डोरी । जहवाँ टूटि फुनि तहमों जोरी ॥२
तिह नखोर हा सरग लुकानी । कै सनेह हरदीं तें मानी ॥३
तिह दिन संवर बाच जिह कीन्हे । अब लै गोबर महि दीन्हे ॥४
बास देइ धनि नाठ चढ़ाये । अब गुन फाटि गाँग बहाये ॥५
बहुरि लोर असु हरदी, रँहहिं वरिन दोइ पार ।६
माथा पुरवहु अपनें साँई, बिनवइ दासि तुम्हार ॥७
टिप्पणी—(१) सवदु—गीत पने । नै—समान ।
(७) पुरवहु—पूरा करो । साँई—स्वामी । बिनवइ—विनय करती है ।
४३५
( तीर्थखण्ड ३१।अ )
जवाव दाइने लोरक सर चाँदा रा
( लोरकका चाँदको उत्तर )
हाँ जानउँ राजा कें जाइ । अपनें हुतें तिह होत पराई ॥१
हौं अस जानउँ बन क जाती । मन न दगउत एकाँ राती ॥२