चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंटिप्पणी—(१) पौर—ब्राह्मण ।
(२) बाँभन—ब्राह्मण ।
(३) किसहुत—कहाँ से ।
(५) सहदेसी—अपने देश का ।
(६) बरैहि—बरोनियों से मूँहा क ।
४२६
( रीडिंग्स ३ ५८ )
गुफ्तने सिरजन बर्रैरे रुजाई इसा असीशन
( सिरजनक बरवाकौक कुसल समाचार कहना )
कँवरू माइ तोर महतारी। लोग कुँटुम घर मैना नारी ॥१
तोरैं चिन्त रैन दिन आहाँहिं। नैन पसार विहि मारग चाहहिं ॥२
अन पानि चरू टेरि न भावइ। बागहि रैन दिन नीँद न आवइ ॥३
पन्थ बगाऊ पूछहिं लोरा। फोउ न कहैं सकूसर तोरा ॥४
सोक सो (मैनामॉअर) भइ। झार विरह अधिक अरि गइ ॥५
दुइ ताहि न सोफ, लोर सँ जो दई न डराइ ।६
तजफे बारि पियाहुत आपन, लीन्हा (नारि) पराइ ॥७
मूलपाठ—( ) मैना बन भैनी मॉअर म् ।
(७) पुरुग् (प्रमंग फ अनुसार यह पाट सर्वथा असंगत है) ।
४२७
( रीडिंग्स ३ ५६ ; बम्बई ४२ )
कजियत आवर्दने बनिज गुफ्तन सिरजन पसु लोरक
( सिरजनक लाएकय अपने बनिजकी बात कहना )
हाँ र पनिज गापरा¹ लै आयउँ। भिरव लेन कौँ² कँवरू भुलायउँ ॥१
उगेय मंदिर अहौँ बसतारा³। अड उठलें कँ भया हँकारा ॥२
पूछसि कौन पनिज तुम्ह आनौँ । कौन दसहुते कियत पयानौँ ॥३
कहा दस धँ गागरौँ आयउँ । गय माँस दाइ पुरुष चलायउँ ॥४
कहा लार नम आपन ठाँऊँ । गाबर का बाँभन मिरजन नाऊँ ॥५