सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

DevanagariAwadhipublished520 पृष्ठ

पृष्ठ 328, कुल 520 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 328

२९५
पायन फेर नारि लै आयउँ । चाँदा तिरी महर थिय पायउँ ॥३
हौं जो आइ जें बाँठा मारा । एसौं राउ रूपचंद हारा ॥४
हम पुनि हरदीपाटन चाली । राजा महूभर कें [—*] फानी ॥५
चाँद सनेह जो निसरेउँ, छाड़ि कुटुंब घर बार ।६
तुम्हरे देस यह टूँटा जोगी, रहा होइ भटपार ॥७
टिप्पणी—(७) भटपार—भटमार, बटोद्दियोंको मार्गमें लूटने वाला ।
३८२
( मनेर १८ ख )
गुफ्त[न] जोगी कि ई जन मनस्त
( जोगीका कहना कि यह मेरी स्त्री है )
टूँटा कहै मोर भार वियाही । परी राढ़ तोरै गवाही ॥१
सभा कहै दुन्हु अब का कीजइ । इँह र बह कँइ कस उतर दीजइ ॥२
दोउ कहहि यह मोरी जोई । इँह हुन्हु महँ हरसाख न होई ॥३
यह टूँटा यह राषन अहई । धनि पूछहु दुन्हु वह का कहइ ॥४
चाँदहि मन कुछ चेत न आवा । अइस मन्त्र पढ़ि टूटें लावा ॥५
लोर कहा यह मोरी तिरिया, औ मुहि गोहन आइ ।६
भा भिखार है टूँटा जोगी, सकति घड़इ लइ जाइ ॥७
३८३–३८८
(अनुपलब्ध)
३८९
( रीडिङ्ग्स १७४ )
रवान शुदने लोरक व चाँदा व रसीदने नजदीके हरदी
( लोरक और चाँद का चलकर हरदीके निकट पहुँचना )
बाह्र कोस दस ऊपर भये । बहुत भाँति महेहुव रवे ॥१
सभ निसि कहहिं पिरम कहानी । पाठ गहरु दिन रैन पिहानी ॥२