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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२०५

चाँद मुयँ कित पावइँ' लोरा । साथ किये सो पहिगै मोरा' ॥३
नैन नीर मरि' सायर पाटी । नाव चढ़ाइ चाँद गुन झटी ॥४
दयों गुसाँई सिरजनहारा । तोहि छाड़ि कस करउँ पुकारा ॥५
जस कीन्हेउँ तस पायउँ, चाँद रहेउँ मन लाइ ।६
जो पाउर मनुसँ चित बाँधि, सो अइसै पछताइ ॥७

पाठान्तर—बम्बई और मनेर प्रति—
शीर्षक—(बं ) मने खुद किवा साखने लोरक बज बजये चाँदा
वाकवाये हाले खुद बाव नमूदन् (चाँदाके वियोगमे लोरकका आत्महत्या
करने की बात कहना); (म ) गिरीस्तने लोरक व फरियाद कर्दने ऊ
( लोरक का रोना और फरियाद करना ) ।
१—(ब ) किउ नहि गाँठ जो मरतेउँ खाई, (म ) किस नहि गाँठ
मरब जो खाई । २—(बं ) मरिहउँ कठनै करै उपकार; (म ) माणिहउँ
कठनैउँ के उपकारा । ३—(म ) ओहि । ४—(बं ) पाठब (म )
पाबहि । ५—(ब ) साथ किये सो बहि गै हम नहिं भोरा (म ) सो
कहि ने तोरा । ६—(ब म ) गै । ७—(बं म ) रूपी । ८—(बं
म ) किह । —(म ) खंड पाँव । ९ —(ब ) मनुसे (म )
मनुसहिं । ११—(ब म ) अन्सहिं ।

टिप्पणी—(१) निउर—निकष ।
(४) सायर—सागर, समुद्र । पाटी—भर दिया । गुन—रस्सी ।
(५) कस—किस प्रकार ।
(७) पाउर—पामर, मूख । अइसै—इसी प्रकार ।

३४८
( रीडिंग्स ३५३ : मनेर ३५५अ )
गुफ्तने लोरक बरख्ते पाकर
(लोरकका पाकर वृक्षके प्रति उद्गार)
बैरिन भइ सो पाकर रूखा' । जिंह तर बसें परा महिँ दूखा ॥१
फाटि पेड़ जरि भूर उपारों । डार डार चीर कै पारों' ॥२
सरि रच आग चहूँ दिसि बारों । चाँद लाइ गियँ आपुहिँ जारों ॥३
देस देसन्तर गये मोर लाजा' । सुरुज चाँद कइ निसि लै (माजा)' ॥४