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सर्वकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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पृष्ठ 307

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३४५
(मधुरकथा)
३४६
(रौतँबूल २६१ : बम्बई ३७)
गिरिया करने लोरक अज बेहोशिये बाँदा
(चाँदो मूछँपर लोरकक विलाप )
छाड़ेउ माइ बाप' महतारी । तजेउँ बियाही मैना नारी ॥१
लोग कुटुंब घर बार बिसारेउँ । देख छाड़ि परदेस सिधारेउँ ॥२
गाँठ ठाँठ पोखर अँबराई । परहरि निसरेउँ कवन उपाई' ॥३
अरब खरब कर लोग न कीन्हेउँ । चाँद सनेह देसन्तर लीन्हेउँ ॥४
विष होइ बाट बात' परी करतारा । न धनि भयउ न मीत पियारा॥५
भइ मात अब आनेउँ, चाँदा तोरें मरन निदान' ।६
जो जिठ जाइ कसा कस देखहि', मैं का करब मधान ॥७
पाठान्तर—बम्बई प्रति—
शीर्षक—तन्हाई व बेकशीए खुद ममूवने लोरक अज बराये चाँदा मुम-
एक शुदन (लोरका अपने अकेलेपन और विवशता पर तड़पना और
चाँदके लिये परेशान होना) ।
१—बाप माइ। २---कवान पाई (काफ मूल आलिफ सून थे, बालिफ
ये धून) सम्भवत बालिफ सून आये पीछे किगर गये हैं। मूलपाठ 'कँवन
उपाई' है। ३—'बात' शब्द यहाँ है। ४-ना। ५- भइ र बात अब
ब्यानहि चाँदा मोर छन होत परान । ६—दैठौ ।
टिप्पणी-(१) परिहरि-परित्याग करके । बिसरेउँ-निकला ।
३४७
(रौतँबूल २६२ बम्बई ३५ सबेर ३६५ख )
पैंजन
(वही)
जीउ पियारा निसर न जाई । पिस न गाँठि मरतेउँ कें खाई' ॥१
मरिहउँ कोइ करुँ सो उपकारा । जीम' खाँड़ इनि मरउँ कटारा ॥२