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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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पृष्ठ 298

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३२७
(रीडिंग्स २५५; बम्बई २७)
आमदने जुम्लारदारान व गुफ़्तन लोरक रा
(ब्राह्मणोंका लोरकमे आकर कहना)
बाँभन जाइ सो दीन्हि असीसा । बात सुनत सब' उतरी रीसा ॥१
लोरक कहा चाँ० कस कीजइ । इहँ बाँभन का' उत्तर दीजइ ॥२
बहुतै जन हम इहँके मारे । मूँड़ फाट के दीन्ह अवाय" ॥३
जं पर राजा लागि गुहारा । क्षस मरत कै दयी उपारा' ॥४
राजा आइ मल_तहँ नियाइ । सुनफे घास तिहिं कइसि पठाई ॥५
मता जो इम तुम उपजं, चाँदा अउर न काऊ आह' ।६
माइ पाप बन्धु कोउ नाहीं, बाँभन पूछहु काह' ॥७
पाठान्तर—बम्बई प्रति—
शीर्षक—रसीदने जुम्लारदारान बर लोरक व चाँदा (लोरक और चाँदाके
निकट ब्राह्मणोंका आना)
१—बाँभन दीन्हि आ० अशीसा । २—मन । ३—इ पहुनहि (?)
कस । ४—बहुत लोग । ५—मूँ० मुंड़ार जो रीस निसारे । ६—जै
ऊपर अब उठे गुभारी । सूझि मरै जो लागि गुहारी ॥ ७—राउ बरा
औ महै निवाइ । धन पान दइ बाघ पठा ॥ ८—सों पर भल आहि ।
९—भा० बपु लोग न कुटुँबा पहुन (?) पुछ अब जाहि ॥
३२८
(रीडिंग्स २५५ बम्बई २८; मनेर १९१ख)
बाज आमदने जुम्लासदारान बर लोरक कलामे राव करका
(ब्राह्मणोंका आकर लोरक से राव करका का सन्देश कहना)
एक बाँभन गा फिर दस आये । बचन राइ कै आइ सुनाये ॥१
चलहु लोर अपने पी' धारहु । हम जियतैं जीउ जिन हारहु ॥२
पठा लोर सँजोइ उतारा । आइ करफ्स राइ जुहारा ॥३
बहुतै बैँरँ चलि हम आये । राजा सोक घरी सँवामे ॥४
नैन न देखा सुनौं न काऊ । दुइँ महँ दान लीन्ह बटाऊँ ॥५