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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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(रीडैम्ब्डूस २७९; बम्बई ४५ मनेर १५९ अ)
गिरफ्तार शुदने बिद्या व दस्त बुरीदने गोरक
(विद्याका पकड़ा जाना और गोरकका उसका हाथ काटना)
विद्यादानि¹ बीत कर गहा² । दस अँगुरी मुख मेलत³ अहा ॥१
कहा पीर मुँहि देहु⁵ जितैं दान् । जीठ छाड़ि काढ़ु मङ् कान्⁷ ॥२
मूँड़ मूँड़ि सब छारै घरे⁸ । हाथ काट अँगुरा⁹ मुँइँ परै¹⁰ ॥३
नौखंड प्रियमी सुना¹¹ न काऊ । वइस दान को देहि¹² बटाऊँ¹³ ॥४
अस कहि दानि अन्यायी होई¹⁴ । जो अस करै पाठ तस सोई¹⁵ ॥५
मुँह फारा कै¹⁶ विद्या,¹⁷ पठवा¹⁸ बेल बँधाई ।६
आपुन राउ¹⁹ फरका, विद्या²⁰ बेग हँकारहु²¹ जाइ ॥७
पाठान्तर—बम्बई और मनेर प्रति—
शीर्षक—(ब) कुसुम्मत शुदन बाज़ गवारियान व गोरक बा घोड़ा
(गोरक और जोड़ेका दानियोंकी मरम्मत करना) (म) दास्तान इज्जो
इनहाज कर्दने खुद पेशो गोरक (हुदरंका कारूसे अनुनय करना)।
दोनों ही प्रतियोंम पंक्ति ४ और ५ क्रमशः ५ और ४ हैं।
१—(ब) बिद्या जोर, (म) हुदरं बाह। २—(म) पर कहा।
३—(म) दस अँगुरी मुँह मेलत (१)। ४—(ब म) कहइ। ५—
(ब) मुहि; (म) मोहि। ६—(म) दै। ७—(ब) किय। ८—
(ब म) दानूँ। ९—(ब) कहा नाक औ काट काँनूँ (म)
ठावेऊं नाक और काटउँ कानूँ। १०—(ब) मूँह मूँड़ि सर खोरिया
परी; (म) मूँड सुझाइ सर बोरी घरी। ११—(ब म) अँगुरी।
१२—(म) परी। १३—(ब; म) प्रियभी सुनों। १४—(ब)
देह (म) दह। १५—(म) न पाऊ। १६—(ब) अस अन्याई
दानि न हो- (म) अइस दानि अन्याइ न हाई। १७—(म) होई।
१८—(ब; म) सुरत कापी। १९—(ब) कर। २०—(ब) बुदया;
(म) हुदई। २१—(म) पैठि। २२—(म) राह। २३—(म)
'विद्या' शब्द नहीं है; (ब) हुदर। २४—(ब) बुलवैहु। २५—
(म) कह बाह।
टिप्पणी—(१) बीत कर गहा—'पीत कर गहा' पाठ भी सम्भव है।
(४) प्रियमी—पृथिवी।