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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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( मनेर १५६प । रीकैण्ड्स २७५ )
दास्तान गुफ़्तने बामन बेगेरुक खुद रा
( बामनका स्वागत-कथन )
बावन कहा बाच हौं मोरी । तोर पुरुप यह तिरिया तोरी ॥१
लोग कुटुम्ब महँ कहियतौँ जाई । मैं तिहि दीन्हों गाँग बहाई ॥२
लोरक चाँद बहुर घर जाइ । धोबी पाछैँ लिखीं पुराइ ॥३
देवर माँझ लोर सर कादा । श्रौ दुनु मौन हुत ठाढा ॥४
तइ चाँदहि आगै ह्वै चला । लोरक वीर पाछ मा भला ॥५
चाँद कहा सो मूरख, जो अइसहिँ पतियाइ ।६
जाकर लीजइ यार मियाही, सो काहे कर पहुनाइ ॥७
पाठान्तर—रीलैण्ड्स प्रति—
शीर्षक—गुफ़्तने बामन लोरक रा पाव उपतादन दर राह तीर राखी
(तीनों तीर राखी जानेक बाद बामनरा लोरकस कहना) इस प्रतिम
पङ्क्तियोंका क्रम ४ ७ १ २ ३ है ।
१- यह । २- लोर बीर यह तिरिया तोरी । ३- लोग कुटुम्प हीं आँगी
जाउ । ४-लोरफ बहुरि घर अपने चा० । ५- नौनी । ६-लिखी ।
७-ओडन फूट (?) बैठ हुत टाढा । ८-लोर । ९-चाँद कहा
सुनु बारी लोरक अहत बहुरि को जाइ । १०-जिहर यार बियाही लीजै,
तिह बरूसे पतियाइ ।
टिप्पणी—( ) बाच—वचन ।
(२) दीन्ह—दिया । गाँग—गङ्गा ।
(३) धोबी—सम्भवतः यह अपपाठ है । रीलेण्ड्सका पाठ 'नौनी ठीक
जान पडता है । नौनी (नवनी)—नवेली युवती । पाछै—पीछा के
कारण ।
(४) इस पक्तिके उत्तर पदका पाठ दोनों ही प्रतियोंमें समुचित रूपमें पढ़ा
नहीं गया ।
(६) अइसहिँ—इसी प्रकार, बिना सोच समझे । पतियाइ—विश्वास कर ।
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