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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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पृष्ठ 288

तुम्हारे । ६—उपत । ७—अस देखिउँ अस मैंक आपतँ । दपीका
ढिला हुत सो पायतं ॥ ८—बावन कहाँ सुनहु तूं मोर । ९—मने
सो कुंकुद मोर ॥
टिप्पणी—(१) काइ लागि—किस लिए । कीन्हि—किया ।
(२) पहिं—पास । आही—थी ।
(३) पिरम—प्रेम । कार—काल । राता—रक्त यहाँ तात्पर्य गारेसे है ।
३१३
( रोलैण्ड्स २७३ ; मनेर १५५अ )
जवाब दादने बावन चौंदा व अन्दाख्तन तीरे दुअममुरु
( बावनका चाँदेको उत्तर देना और दूसरा तीर छोड़ना )
अहि¹ पापिन तिहिका मारों । नाक काटि कै² देस निसारौं ॥१
तिहि अस तिरि गोवरौं³ घसि लेई । पात फइस अस ऊतर देई ॥२
कस लोरक⁴ सेतें मोहि डरावई⁵ । तू बड़बोल जान जो पावइ ॥३
तिहि लग लोरक जी गँवाइह । भेंट मई अब जान न पाइह ॥४
पुरुष मार ओडन मदिं¹¹ फोरउँ । काटउँ मूँड़ भुजादण्ड तोरउँ ॥५
अस सुन लोरक (सिंघ) कोपा, ओडन ढाँढ सँभार¹² ॥६
बावन एक फॉक सर छोड़ा, गयउ भिरिख सो फार ¹³ ॥७
पाठान्तर—मनेर प्रति—
शीर्षक—दास्तान जवाब गुफ्तने बावन बा चाँदा (चाँदको बावनका उत्तर) ।
१—अरी । २—तिहि । ३—गावा ('र' लिखनेसे छूट गया प्रतीत होता है) । ४—अन । —शेर । ५—डरपावति । ७—तू पै बाल आइ जन पावति । ८—गँवावा । ९—भइ भट । १०—पावा । ११— सँठ । १२—अस सुनि लोरक सिंघ अस गावा कर ओन्न सँभार । १३—बावन एन चाहि सर छोड़ा अगराई तीर सभार ॥
मूलपाठ—(१) सिग ।
टिप्पणी—(१) तिहि—तुझको । निसारौं—निकालूँ ।
(३) बड़बोल—लम्बी लम्बी बातें करनेवाली; बातूनी ।