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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२११
ढांकी मूंदि हुती अँधियारी । अब यह पात फरउँ उजियारी ॥३
काह फरै तू मारसि मोरा । दई दीन्हि मैं पावउँ लोरा ॥४
अब गरुवइ होइ आछहु मैनाँ । जीभ सँकोर राखु मुख बैनाँ ॥५
भाइ लोग हुत राठैं, तासो भयउ मेराउ ।६
मोतिन्ह हार मँह घुँघची, मैना सोइ न पाउ ॥७
२६५
(रीडिंग्स २१ ख, बम्बई १४)
जवाब दादने मैना बर चाँदा रा
(मैनाका चाँदाको उत्तर)
पुरुख मग सौं सरभर¹ पावइ । मार पिधाँस खाइ घर आवइ ॥१
मँछु नीरा² चारा कहँ धावइ । लै कै भगत मैंढारन³ आवइ ॥२
मोरा⁴ मे नर मेवा जामी । कहौँ पगाठ होई⁵ गयउ अदाई ॥३
छोडि कैस करिहौ पछितावा । सँमर नेर अँबरॉयहिँ आवा ॥४
देवस घार तुम्ह देंह सुखाइह । साइ मोर कर का घट जाइह ॥५
मैंवर जो पठवै बैने, सील मानय जो भुलाई ।६
बिन एफ [लै*] बास रस, उदरैं कँवल मर जाइ ⁷ ॥७
पाठान्तर—बम्बई प्रति—
शीर्षक—मदानगी व दिलावरीए लोरक शुफ्तने मैना व कशदन नमूदने
चाँदा रा (मैनाका लोरककी वीरताकी बड़ाई करना और चाँदाको नीचा
दिखाना) ।
१—सरपर । २—नीर । ३—भेंटारहि । ४—मोबर । ५—कहा बारि
हर । ६—केइ वर बहुत होइ पछतावा । नेअर चोरल अँवगरहिं आवा ॥
७—था । ८—मँवर कह फिर बैंसिए दुइ मानत भुलाइ । —बिन
एक १ बास रस भँवर कँवल मर जाइ ॥