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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२२१
चलत पाइ फर आरो पावा । कहा पँवरियहिँ तसकर आवा ॥४
चाँद कहा मैं घेरि भुलावउ । फूलहिं कहँ फुलवारि पठाऊअ ॥५
अखरैं पँवर घजर कै, बीर समुँद या मागि ।६
चाँद चढ़ी चौखण्डी, पँवर बझर होइ लागि ॥७
टिप्पणी—(४) आरो—आहट । तसकर—तस्कर, चोर ।
२३३
( रौकेन्स १६३ )
मुवज्जिमै शिमुर्दने लोरक चाँदा बर कस खुद रफ्तन
(चाँदाका धौरहर पर जाकर लोरकका ग्रह देखना )
चाँदा धौराहर चढ़ि अस चाहा । बुरुज कौन मंदिर दिन आहा ॥१
जनम अस्थान छाड़ पग धरा । पाँच आठ सत्रह दिन फिरा ॥२
मीन राशि जो फरकाहिँ आहइ । संग परोस नियर होइ आहइ ॥३
तुलाँ रैन दिन दूसम आवहिँ । पन्थ बराबर बैरी पावहिँ ॥४
पाछे मरै गगन चढ़ आवइ । रैन चाँद कस घेरी पावइ ॥५
यहि दिन होइ मिलावा, चाँद गुनि देखी राशि ।६
गांग लाँधि कै लोरक, जो हरदीँ लै बासि ॥७
२३४
( रौकेन्स १६४ )
पुरसीदने मैना मर लोरक रा जेह शव कुजा बूद
( मैनाका लोरकसे रातको गायब रहनेकी बात पूछना )
मैना पूछहि कहाँ निसि कीन्ह । कौन नारि मोर कँ दीन्ह ॥१
रकत न देह हरद बनु लाइ । औ मसि मुख पै दीन्हि चढ़ाई ॥२
पियर पात अस लोरक डोलसि । मुर मुर हँस निरग भा बोलसि ॥३
हौं मनुसहिं ओहट पहचानी । बात कहौ नैन देख बानी ॥४
धीरु फाछ सत आप गँवाया । सत कहि हंजस तुम घर आवा ॥५