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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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( रीफ्रेंस १०६ )
बस्ते सुबह गाना कर्ने चाँदा लोरक बा बेर एकत
( प्राताकाल चाँदका लोरकको सीसराने भींचे उठाना )
केलि करत सब रैन बिहानी । देख घर धनि उठी डरानी ॥१
जाँलहि चेरी उठै न पावा । साँलहि चाँदै सुरुज लुकावा ॥२
मन सँउ आपुन नाहीं लोरा । मत कुछ होइ सुल टर तोरा ॥३
मत कोइ चेरी देख पावा । जाइ महर पहँ बात जनावा ॥४
जो कोइ तिहको देख आई । हाँ पुन मरों तोहु बिख खाई ॥५
पिरम खेलैँ सो कर साहस, सो तरि लागे पार ।६
माँझ समुद होइ थाके, तीर लाउ करतार ॥७
२२७
( रीफ्रेंस १०० )
आब आवदने कनीज़गान व रूये चाँदा शुस्तन व आमदने सहैलियान
( दासियोंका पानी लाकर चाँदका मुँह धुलाना ; सहेलियोंका आना )
भोर चेरि पानी लै आयीं । मुख धोवा और सखी बुलायीं ॥१
फेंफर मुख निसि चाँद न सोभा । चीर फाट कहुवाँ सइ गाभा ॥२
फिरी माँग केस उधियानी । फूल झरि मरि रही कुम्लानी ॥३
सखिहँ देखि दो बातें अइसे । तोर चाँद कर आँगी कैसे ॥४
भये अनन्द लोयन रतनारी । रंग रस तंबोल पियारी ॥५
चोली चीर सँवारहु, सीस सिन्दूरहु माँग ।६
भँवर फूल पर बैठो, लाग दीख तिइ ऑँग ॥७
२२८
( रीफ्रेंस १०८ )
बज़म दादन चाँदा मर सहैलियान अज़ बहाना
( चाँदका सहेलियोंसे बहाना करना )
चाँद सहलिन सा अस कहा । एकउ चेरि न जागत रहा ॥१